रेलवे सुरक्षित ट्रेन परिचालन के लिए ड्रोन कैमरो की मदद लेने की तैयारी है। मंडल का लगभग फीसद हिस्सा नक्सल प्रभावित है। इन क्षेत्रों में नक्सली बंद के दौरान या तो ट्रेनों की रफ्तार धीमी कर दी जाती है या फिर उनका मार्ग ही बदल दिया जाता है। इसके बावजूद नक्सली सुनसान इलाकों में रेल पटरियों पर विस्फोट कर आवागमान को पूरी तरह ठप कर ही डालते हैं। धनबाद रेल मंडल में कई बार पटरियों पर विस्फोट की घटनाओं के कारण एक्सप्रेस ट्रेनें दुर्घटना का शिकार होने से बची हैं।








अति नक्सल प्रभावित सीआइसी रेल खंड पर तो तो ऐसी घटनाओं के कारण कई बार मालगाड़ियां बेपटरी तक हो चुकी हैं। घटना के पहले रेलवे के सुरक्षाकर्मियों को नक्सलियों की गतिविधियों की सूचना नहीं मिल पाती। माओवादी रेल पटरियों के आसपास जंगलों में छिपे रहते हैं और मौका ताड़कर विध्वंसक घटनाओं को अंजाम दे डालते हैं।

घटना के बाद भी घटनास्थल पर नक्सलियों की मौजूदगी या फिर हमले की आशंका को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों को बेहद सावधानी से जाना पड़ता है। इस कारण ऐसी घटनाओं के बाद घंटों रेल परिचालन ठप पड़ा रहता है। हजारों यात्री ट्रेनों और स्टेशनों पर फंसे रहते हैं पर अब नक्सलियों की रेलवे ट्रैक के आसपास की गतिविधियों का रेलवे के सुरक्षाकर्मियों को समय से पता चल जाएगा।




ऐसा संभव होगा ड्रोन कैमरों की निगरानी से। रेलवे नक्सली बंद के दौरान माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लेने की तैयारी कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बंद के दौरान नक्सल इलाकों में ड्रोन के सहारे निगरानी की जाएगी। सबकुछ ठीक ठाक पाए जाने पर ट्रेनों का परिचालन होगा। पहले ड्रोन से इलाके की गिनरानी कराई जाएगी।




बता दें कि धनबाद मंडल में तेतुलमारी से लेकर गया तक का रेल क्षेत्र नक्सल प्रभावित माना जाता है।फीसद नक्सल प्रभावित है धनबाद रेल मंडल का क्षेत्रकिलोमीटर प्रति घंटा कर दी जाती है नक्सली बंदी में ट्रेनों की रफ्तारदिल्ली की बैठक में चर्चा 1कुछ दिन पूर्व दिल्ली में आयोजित आरपीएफ की उच्चस्तरीय बैठक में नक्सल क्षेत्रों में ड्रोन के इस्तेमाल पर चर्चा हुई है। इसके बाद मंडल में इसके प्रयोग की तैयारी की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से बंद के दौरान नक्सली रेल क्षेत्र में उपद्रव नहीं कर सकेंगे। समय से उन्हें जवाब दिया जा सकेगा।

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