बंगले पर प्यून की तैनाती रेल अफसरों को पड़ सकती है भारी

बंगलों में चपरासी की नियुक्ति करा उनसे घरेलू काम करा रहे रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई के घेरे में फंस सकते हैं। रेलवे मंत्रालय ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की जल्द कवायद शुरू करने पर विचार कर रहा है। मंत्रालय इस बात को लेकर खासा नाराज है कि अदालत के आदेश और प्रधानमंत्री के निर्देश के बावजूद अधिकारी इस प्रथा को रोकने में नाकामयाब रहे हैं।







रेल मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक अगर रेलवे बोर्ड के उच्च अधिकारी इस संबंध में कदम नहीं उठाते तो ऐसे कर्मचारी नियुक्त करने वाले अधिकारियों के साथ साथ उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। दरअसल रेलवे के करीब छह सात हजार अधिकारियों को अपने बंगलों में चपरासी नियुक्त करने का अधिकार है। इन कर्मचारियों का कार्यकाल तीन साल का होता है और इन्हें बंगला पियन के नाम से जाना जाता है।इस तरह एक अधिकारी अपने कार्यकाल में करीब नौ से दस बंगला चपरासी नियुक्त करता है।




सूत्रों के मुताबिक अधिकारी अपने घरों पर सेफ्टी स्टाफ के तौर पर ऐसे कर्मियों की नियुक्ति करा कर उनसे घरों में काम कराते हैं। साल 2017 में उत्तर प्रदेश के खतौली में हुई रेल दुर्घटना के वक्त ऐसे कई सुरक्षा कर्मियों को अधिकारियों के घर से हटाया गया था।

मंत्रालय ने पाया है कि बावजूद इसके अभी भी कई अधिकारियों के आवास पर बंगला चपरासी काम कर रहे हैं। इस मामले में केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल भी कई बार इस तरह की नियुक्तियों को गैरकानूनी ठहरा चुका है। इन आदेशों से तत्कालीन रेलवे बोर्ड प्रमुखों को भी अवगत कराया गया।




लेकिन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि तब से लेकर आज तक रेलवे बोर्ड के किसी प्रमुख ने इस पर कार्रवाई नहीं की। सूत्र बताते हैं कि कई मामलों में तो तीन साल घर में कामकाज करने के बाद ऐसे चपरासियों को सीधे ग्रुप डी कर्मी के तौर पर रेलवे में नौकरी में रख लिया गया। इसके लिए किसी तरह की प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। जबकि सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि सभी तरह के पदों के लिए विज्ञापन निकाला जाना चाहिए और प्रतियोगी परीक्षा के जरिए उनकी नियुक्ति होनी चाहिए। अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय ने पाया है कि बंगला चपरासियों से अधिकारी घरों की साफ सफाई से लेकर अन्य सभी तरह के घरेलू काम कराते हैं।

Source:- NaiDunia