बड़ा खुलासा – रेलवे में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले सबूतों पर आधारित दैनिक भास्कर की रिपोर्ट

आपको सुनकर ताज्जुब होगा लेकिन यह बिल्कुल सही है कि मुजफ्फरपुर जंक्शन पर रोज प्लेटफॉर्म की खरीद-बिक्री होती है। प्लेटफॉर्म पर स्टॉल लगाने वाले और वेंडर इसके खरीददार होते हैं। जबकि रेलवे के अफसर और कर्मचारी विक्रेता। प्लेटफॉर्म का सौदा होने के बाद अफसर यह तय करते हैं कि किस प्लेटफॉर्म पर कौन-कौन सी ट्रेन लगेगी। वेंडर और स्टॉल मालिक इसलिए प्लेटफॉर्म खरीदते हैं ताकि उनके खाने-पीने की चीजों की अधिक से अधिक बिक्री हो सके। अत्यधिक भीड़-भाड़ वाली ट्रेनों को प्राथमिकता दी जाती है। पीक सीजन व लीन सीजन का अलग-अलग रेट होता है। हर स्टॉल की न्यूनतम दर भी तय है। एक स्टॉल काे एक ट्रेन के लिए कम से कम 200 रुपए देने होते हैं। यह सब रेल कर्मचारी व स्टॉल संचालक मोबाइल पर तय करते हैं। रुपयों का लेन-देन हर दिन आठ-आठ घंटे पर होता है, क्योंकि कर्मचारियों का शिफ्ट बदल जाता है। सुबह व शाम चाय-नाश्ते का समय होने के कारण बोली ज्यादा लगाई जाती है। दैनिक भास्कर के पास रेल कर्मचारी व स्टॉल संचालकों के बीच मोबाइल पर हुई बातचीत का ऑडियो क्लिप है। जनवरी 2018 में अलग-अलग तिथि के 18 ऑडियो क्लिप के आधार पर इस बड़ी सौदेबाजी का खुलासा हुआ है।








स्टेशन पर रोज बिकते हैं प्लेटफॉर्म, वेंडर लगाते हैं बोली, सौदा पटते ही अफसर देते हैं ट्रेन को हरी झंडी
6 प्लेटफॉर्म पर कुल 40 स्टॉल हैं
1 व 3-4 पर सबसे अधिक स्टॉल, 2 व 5 पर 4 स्टॉल
70 सवारी ट्रेनें जंक्शन से हर दिन गुजरती हैं
वेंडर की मर्जी पर बदल जाता है ट्रेनों का प्लेटफॉर्म
स्टॉल संचालक की मर्जी पर यहां ट्रेनों का प्लेटफॉर्म बदल दिया जाता है। यदि स्टॉल संचालक या वेंडर आनाकानी करें तो ट्रेन को दूसरे प्लेटफॉर्म पर भेज दिया जाता है। महत्वपूर्ण ट्रेनों का प्लेटफॉर्म निर्धारण से पहले स्टॉल संचालक की मर्जी पूछी जाती है। यदि, स्टॉल संचालक प्लेटफॉर्म खरीदने से मना कर दे तो उसे दूसरे प्लेटफॉर्म पर भेज दिया जाता है।
प्लेटफॉर्म बिकने तक आउटर सिग्नल पर ही खड़ी रहती हैं ट्रेनें
ऐसे समझें वसूली के खेल का गणित
मुजफ्फरपुर जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-2 पर चार प्रमुख स्टॉल हैं। प्रत्येक स्टॉल से एक शिफ्ट में कम से कम 200 रुपए वसूले जाते हैं। इस तरह तीन शिफ्ट में एक स्टॉल वाले को प्रतिदिन 600 रुपए देने पड़ते हैं। यानी कि सिर्फ 2 नंबर प्लेटफॉर्म से हर दिन 2400 रुपए की वसूली होती है। ट्रेनों में भीड़ को देख कर रेट बढ़ा दिए जाते हैं।




आउटर पर रुकी ट्रेन।
मिथिला, टाटा-छपरा और इंटरसिटी जैसी ट्रेनों के लिए लगाई जाती है अधिक बोली
मुजफ्फरपुर जंक्शन पर छह प्लेटफॉर्म हैं। हर दिन औसतन 70 सवारी ट्रेनें गुजरती हैं। इनमें से एक व तीन-चार पर सबसे अधिक स्टॉल हैं। इसमें टाटा-छपरा एक्सप्रेस, मौर्य एक्सप्रेस, बाघ एक्सप्रेस, मिथिला एक्सप्रेस, इंटरसिटी सवारी ट्रेन, सीतामढ़ी-मुजफ्फरपुर सवारी ट्रेन जैसी ट्रेनों के लिए अधिक बोली लगाई जाती है।
रेल कर्मचारी व स्टॉल संचालक व वेंडर के बीच मोल-जोल होने तक जंक्शन पर आने वाली ट्रेनें अक्सर आउटर सिग्नल पर खड़ी रहती हैं। इसमें कभी-कभी आधा घंटे का भी समय लग जाता है। सब कुछ तय होने के बाद ही परिचालन विभाग आउटर पर खड़ी ट्रेन का प्लेटफॉर्म घोषित करता है।
ऑडियो टेप में दर्ज बातचीत से जानिए कैसे होता है सौदा…
वेंडर- हेलो,
रेल कर्मी- दुकान पर हैं कि नहीं।
वेंडर- हां, दुकान पर हैं। बोलिए।
रेल कर्मी- क्या करना है, इंटरसिटी काे।
वेंडर- दो पर दीजिए न। अकेले मेरे ऊपर लोड है। 100 रुपए देंगे, अब क्या करें।
रेल कर्मी- नाश्ता भेज दो। और 100 रुपए भी। तुम अकेले इतना रो रहे हो तो क्या करें।
वेंडर- अकेले पर ही तो हम हिचक रहे हैं। सबका सपोर्ट रहता तब न हिम्मत रहता। तब हम आगे रहते। सारा खर्चा हम ही को देना पड़ता है। जो भी आप लोगों की सेवा का…।

रेल कर्मी- हेलो, कौन?
स्टॉल संचालक- हां… 2 नंबर से बोल रहे हैं। बोलिए।
रेल कर्मी- 5201 का क्या करना है।
स्टॉल संचालक- 5201 का, अभी दुकान पर नहीं हैं। 1 नंबर पर ले लीजिए। रहते तो पैसा भी मिलता, अभी पैसा नहीं मिलेगा।
रेल कर्मी- क्या बोला?
स्टॉल संचालक- बोले हैं कि गाड़ी एक नंबर पर कर लीजिए।
रेल कर्मी- क्या.. क्या हाल है
वेंडर- ठीक है। चल रहा है।




रेल कर्मी- अरे! तुम्हारे लिए हम इतना सोचते हैं, और तुम कुछ सोचता ही नहीं है। आज तो तीन-तीन गाड़ी कर दिए। वेंडर- हां… कर दिए । पर सब दिन करिएगा तब न। एक दिन में क्या होगा?
रेल कर्मी- टाटा, 5202, 55226 कर दिए। वेंडर- हां, वह तो ठीक है। आए थे वो पैसा के लिए…
रेल कर्मी- हेलो… 5201 दो नंबर पर दे दें क्या?
स्टॉल संचालक- हां, 5201 दो नंबर पर दीजिए न.. एक 6.30 बजे वाला 6 नंबर पर भेज दीजिए, मड़ुआडीह भी…

साक्ष्य के आधार पर पूरे मामले की जांच करेंगे। दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। -अतुल सिन्हा, डीआरएम, सोनपुर रेल मंडल, पूर्व मध्य रेलवे
बड़ा खुलासा| रेलवे में फैले भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले सबूतों पर आधारित दैनिक भास्कर की रिपोर्ट