Indian Railways is linking its trains via ISRO satellites to allow live  tracking- Technology News, Firstpost
  • कैरिज एंड वैगन के कर्मचारियों का जबरन फुलेरा ट्रांसफर किया
  • ट्रैवलिंग अलाउंस और एचआरए को बचाने के लिए लिया गया निर्णय

उत्तर पश्चिम रेलवे का जयपुर मंडल इन दिनों विवादों का गढ़ बन गया है। मंडल के अधिकारियों द्वारा आए दिन कोई ना कोई विवादित आदेश निकाले जा रहे हैं। बीते शुक्रवार को भी यांत्रिक और कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने विवादित आदेश निकला। इसके बाद रेलवे श्रमिक संगठन और प्रशासन आमने-सामने आ गए। श्रमिक संगठनों ने डीआरएम, सीनियर डीएमई और सीनियर डीपीओ का बहिष्कार कर उनके खिलाफ नारेबाजी की।

ये है पूरा मामला
जयपुर मंडल प्रशासन ने बीते शुक्रवार देर शाम एक ट्रांसफर आदेश जारी किया। इसमें जयपुर में कार्यरत कैरिज एंड वैगन (सीएडंडबल्यू) के सीनियर सेक्शन इंजीनियर से लेकर ग्रुप डी श्रेणी के 100 कर्मचारियों का ट्रांसफर फुलेरा कर दिया। इसकी सूचना ना तो श्रमिक संगठनों को थी और ना ही कर्मचारियों को। लिस्ट जारी होते ही पूरे जयपुर स्टेशन पर विरोध शुरू हो गया। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सभी लोगों के ट्रांसफर नियमों के विरुद्ध किए गए हैं।

टीए, टीपीए और कम एचआरए की गणित में निकाले आदेश
रेलवे ने खर्चों में कटौती करने के लिए ये आदेश निकाले हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अभी जिन कर्मचारियों को फुलेरा ड्यूटी पर भेजा जा रहा है, उन्हें ट्रैवलिंग अलाउंस (टीए) देना पड़ रहा है। ऐसे में रेलवे ने सभी का प्रशासनिक हित में अस्थाई तौर पर एक साल के लिए ट्रांसफर किया है।

इससे एक तरफ जहां रेलवे को कर्मचारियों को टीए नहीं देना पड़ेगा। वहीं अस्थाई आदेश होने के कारण ट्रांसपोर्टेशन एंड पैकिंग अलाउंस (टीपीए) भी नहीं देना पड़ेगा। साथ ही फुलेरा में जयपुर की बजाय हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) भी 16 की बजाय 8 प्रतिशत ही देना पड़ेगा।

श्रमिक संगठन और प्रशासन आमने-सामने
इस लिस्ट के जारी होने के बाद से ही पूरे मंडल में इसका विरोध शुरू हो गया। नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉइज यूनियन के मंडल अध्यक्ष मुकेश चतुर्वेदी और उत्तर पश्चिम रेलवे मजदूर संघ के मंडल अध्यक्ष सौरभ दीक्षित ने मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) और मंडल के अन्य अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

श्रमिक संगठनों ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि रेलमंत्री ने दमन की नीति अपना ली है, वे इसी तरह के नियम विरुद्ध कार्रवाई कर कर्मचारियों को परेशान करना चाहते हैं, ताकि बड़ी संख्या में कर्मचारी खुद ही रेलवे छोड़कर चले जाएं।