अपने उत्पादन क्षमता के लिए देश दुनिया में मशहूर जमालपुर रेल कारखाना में अब कई पद समाप्त करने की चर्चा जोरों पर है। इस चर्चा ने रेल यूनियन नेताओं के साथ ही रेल कर्मियों की परेशानी बढ़ा दी है। रेल कर्मियों की मानें तो रेलवे बोर्ड की ओर से अनावश्यक पदों को समाप्त करने को लेकर सभी जोन के पदाधिकारियों और उत्पाद इकाई से प्रस्ताव मांगा गया है।

इसके बाद कारखाना प्रशासन भी गुपचुप तरीके से कई पद को सरेंडर करने की योजना बनाने में जुट गई है। इस खबर ने रेल इंजन कारखाना में कार्यरत सात हजार अधिकारियों और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ा दी है। कारखाना के विश्वस्त सूत्रों की मानें तो कारखाना की कंबाइंड बिल्डिग में कर्मचारियों एवं अधिकारियों के सर्विस रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है।

रेलवे बोर्ड द्वारा सभी जोन के महाप्रबंधक को पत्र लिख कर गैर जरूरी पदों को सरेंडर किए जाने को लेकर प्रस्ताव मांगा है। यही वजह है कि कर्मचारी अधिकारी एवं यूनियन नेताओं के बीच बेचैनी के साथ बौखलाहट भी बढ़ गई है। इधर निजीकरण के सवाल पर जमालपुर कारखाना के सभी यूनियन अब आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं।

यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष सत्यजीत कुमार, मेंस यूनियन के शाखा अध्यक्ष विश्वजीत कुमार, शाखा सचिव मनोज कुमार, एससीएसटी एसोसिएशन के जोनल नेता चांदसी पासवान एवं पूर्वी रेलवे कर्मचारी संघ एवं भारतीय मजदूर संघ के वित्त सचिव भानू प्रताप पाठक ने कहा कि निजीकरण या निगमीकरण का शिकार कारखाना के रेलकर्मियों को नहीं होने देंगे। रेल कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए यूनियन कोई भी कुर्बानी देने को तैयार है।