Janata Curfew: For the first time in Indian Railways' history ...

मंडल रेल प्रशासन पुराने भवन व पुराने तकनीक वाले कंट्रोल रूम से मुक्ति पाने जा रहा है। इसके स्थान पर आधुिनक तकनीक से लैस कंट्रोल रूम स्‍थापित किए जाएंगे। बनाने जा रहा है। इसके लिए छह करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इसके बाद रेल मंडल में आसानी से ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा।

लखनऊ से सहारनपुर तक, मुरादाबाद से दिल्ली तक, लक्सर से देहारदून तक, मुरादाबाद से अलीगढ़, उन्नाव तक ट्रेनों का संचालन करने के लिए डीआरएम आफिस में कंट्रोल रूम बनाया गया है। यह कंट्रोल रूम पुराने भवन में बना हुआ है। काफी सिस्टम भी पुराने जमाने के ही लगे हैं। यहां 24 घंटे नौ विभाग से 50 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। पिछले दिनों कंट्रोल रूम में काम करने वाले काफी कर्मचारी कोरोना संक्रमित पाए गए थे।  

यहां बनेगा कंट्रोल रूम मंडल रेल प्रशासन स्थायी रूप से अब आधुनिक सिस्टम वाला कंट्रोल रूम बनाने जा रहा है। नया कंट्रोल रूम डीआरएम आफिस के बगल में खाली जमीन पर बनाया जाएगा। यह दो मंजिला भवन होगा। नीचे पार्किंग स्थल होगा, ऊपर कंट्रोल रूम काम करेगा। कंट्रोल रूम को इस तरह से तैयार कराया जा रहा, जिससे ताजी हवा आसानी से आ सके। इससे संक्रमण फैलाने वाले वायरस अंदर नहीं रह पाएंगे।

ट्रेनों का संचालन करने, मंडल भर के विभिन्न स्टेशनों से संपर्क करने की नई व्यवस्था की जाएगी। जिससे कम समय में ट्रेनों को आसानी से चलाया जा सके। वर्तमान में कंट्रोल रूम के कर्मचारी स्टेशन मास्टर को ट्रेन चलाने की आदेश देता है। स्टेशन मास्टर उसके बाद सिग्नल देने, ट्रेन चलने को लाइन बनाने का काम करता है। नई व्यवस्था के बाद कंट्रोल रूम के कम्प्यूटर से आदेश मिलते ही स्टेशन का सिस्टम बना रुके चलने वाली ट्रेन को सिग्नल खुद दे देगा।

अपर मंडल रेल प्रबंधक एमएस मीना ने बताया कि कोरोना के कारण पुराने कंट्रोल रूम को बंद कर दिया है। अस्थायी कंट्रोल रूम से ट्रेनों का संचालन कराया जा रहा है। शीघ्र ही स्थायी व आधुनिक सुविधा वाला कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। जिस पर छह करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।