रेलवे वर्कशापों के निजी हाथों में जाने के खतरे से परेशान कर्मचारी

| July 14, 2020
Locomotives And Coach Factory Of India

कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन ने वर्कशॉप में कांट्रेक्ट पर काम कर रहे सैकड़ों हाथों से काम छीन लिया। कोरोना ने रेलवे वर्कशॉप में आउटसोर्स का काम बंद कराया तो ठेके पर रोजाना काम करने वाले 350 से 400 श्रमिक बेरोजगार हो गए। लॉकडाउन में ट्रेनों के न चलने से वर्कशॉप में 30 से 35 फीसदी काम कम हो गए। इस वजह वर्कशॉप प्रबंधन को मैनपॉवर आउटसोर्स खत्म करना पड़ा। 

रेल संगठन और वर्कशॉप के कर्मचारी इसी आउटसोर्स को बंद कराने के लिए पिछले कई महीनों से कई बार धरना-प्रदर्शन किया, अफसरों से लेकर रेलवे बोर्ड तक ज्ञापन भेजा। अब उन मांगों को कोरोना ने पूरा करा दिया। कोरोना का संक्रमण हुआ तो धीरे-धीरे वर्कशॉप में काम कम होने लगा और फिर अपने आप ही मैनपॉवर आउटसोर्स न के बराबर हो गया। इससे रेलकर्मियों में तो खुशी की लहर है लेकिन सैकड़ों लोगों का रोजगार छिन गया। वर्कशॉप के सहायक वर्कशॉप प्रबंधक ने बताया कि अधिक काम न होने की वजह से मैन पॉवर आउटसोर्सिंग खत्म कर दी गई है। सभी काम कर्मचारियों से ही कराए जा रहे हैं। 

पूरी क्षमता से काम कर रहे रेगुलर रेलकर्मी 
आउटसोर्स खत्म हो जाने से अब तीनों शिफ्ट में वर्कशॉप के सभी कर्मचारी पूरी क्षमता के साथ काम तो कर रहे हैं। साथ ही वे बेहद खुश भी हैं। कर्मचारियों का कहना है कि जब कर्मचारी अपनी पूरी क्षमता से काम करने के लिए तैयार हैं तो आउटसोर्स से काम करने का कोई औचित्य ही नहीं बनता है। 

कर्मचारियों को सता रहा था निजीकरण का डर
वर्कशॉप में बढ़ते आउटसोर्स को देखते हुए वर्कशॉप में काम करने वाले कर्मचारियों को वर्कशॉप के निजीकरण का खतरा सताने लगा था। एक दौर ऐसा आया जब वर्कशॉप के अधिकतर कर्मचारियों के पास कोई खास काम ही नहीं था। काम कम होते देख कर्मचारियों ने मांग की कि रेल वेतन दे रहा है तो पूरा काम भी दे। कर्मचारियों की इस मांग पर रेलवे बोर्ड को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था और आउटसोर्स से कराए जा रहे कुछ काम दोबारा से कर्मचारियों से कराए जाने लगे।  

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Category: News

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