रेलवे में काम कर रहे रिटायर्ड कर्मचारियों का जाना लगभग तय, माली हालत नाजुक

| July 2, 2020
Rail Transport in India

भारतीय रेलवे स्तर पर पुनर्नियोजित कर्मचारियों की सेवा समाप्त होगी। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। लखनऊ, इज्जतनगर मंडल के अलावा मुख्यालय गोरखपुर स्थित कार्मिक विभाग के पुनर्नियोजित कर्मी पांच माह पहले ही हटा दिए गए हैं।

रेल कर्मचारियों में उहापोह की स्थिति विभागीय जानकारों के अनुसार अगले सप्ताह में पूर्वोत्तर रेलवे में एक भी पुनर्नियोजित कर्मचारी शेष नहीं बचेंगे। संख्या शून्य हो जाएंगी। हालांकि, रेलवे बोर्ड ने जोनल कार्यालयों को अभी समीक्षा करने के लिए निर्देशित किया है। विभागों में समीक्षा शुरू भी हो गया है। लेकिन समीक्षा की औपचारिकता के साथ ही पुनर्नियोजित कर्मचारियों की सेवा भी समाप्त कर दी जा रही है।

इसको लेकर वाराणसी मंडल, कारखानों व अन्य विभागों में तैनात शेष बचे पुनर्नियोजित कर्मचारियों में उहापोह की स्थिति बनी हुई है। अब वे भी अपनी सेवा समाप्ति तय मान रहे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे में नवंबर 2020 तक 597  पुनर्नियोजित कर्मचारी तैनात किए गए हैं।

भारतीय रेलवे में 2017 से लागू है री-इंगेजमेंट स्कीम विभागीय कार्य प्रभावित न हों, इसके लिए भारतीय रेलवे में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए वर्ष 2017 से री-इंगेजमेंट स्कीम (पुनर्नियोजन योजना) लागू हैं। एक दिसंबर 2019 को यह स्कीम समाप्त हो रही थी, लेकिन रेलवे बोर्ड ने इसे एक साल के लिए बढ़ा दिया था। बाद में एक वर्ष पूरा होने से पहले ही यह स्कीम धराशायी हो गई। जानकारों का कहना है कि संक्रमण काल में वैसे ही दफ्तरों में पर्याप्त कार्य नहीं है। रेलवे में जल्द ही ई आफिस भी अनिवार्य हो जाएगा। सारे कार्य ई प्लेटफार्म पर ही होंगे। ऐसे में पुनर्नियोजित कर्मचारियों की उपयोगिता नहीं रही गई हैं।

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