रेलवे कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर – रेलवे में क्वारंटीन लीव को मिला स्पेशल लीव का दर्जा

| July 2, 2020
Surviving a Brand Quarantine During Covid-19 – Adweek

रेलवे में कोविड-19 के दौरान क्वारंटीन लीव को भी स्पेशल लीव का दर्जा दिलाने में वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ का संघर्ष रंग लाया है। इससे हजारों रेलकर्मियों को राहत मिलेगी।  संघ के महामंत्री अशोक शर्मा ने 25 जून को पमरे महाप्रबंधक शैलेन्द्र कुमार सिंह से मुलाकात कर लॉकडाउन में आने वाली व्यावहारिक परेशानियों के बारे में चर्चा की थी। जिसे न्यायसंगत मानते हुए जीएम ने प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी एमआर गोयल को निर्देशित किया था।

श्री गोयल के अनुमोदन के पश्चात कार्मिक प्रशासन द्वारा लॉकडाउन में फँसे रेल कर्मचारियों और बाद में क्वारंटीन हुए कर्मियों को विशेष आकस्मिक अवकाश देने की स्वीकृति के आदेश मंगलवार को जारी कर दिए। श्री शर्मा ने बताया कि कोविड-19 की वैश्विक महामारी के चलते हुए लॉक डाउन व उसके पश्चात कार्यालय खुलने के बाद विभिन्न राज्यों,जिलों से लॉकडाउन में फँसे रेल कर्मचारियों के वापस लौटने पर उनको क्वारंटीन करने पर उनकी खुद की छुट्टी लगेगी या विशेष आकस्मिक अवकाश देय होगा, इस पर असमंजस की स्थिति बरकरार थी लेकिन मजदूर संघ की पहल पर जीएम ने अवकाश को स्पेशल लीव का दर्जा दे दिया  है।

नार्थ वेस्ट रेलवे में निकल गए थे गलत आदेश

NWR रेलवे में एक रेलवे अधिकारी के आदेश काफी चर्चा रहे। ऐसा इसलिए- क्योंकि जिस अधिकारी ने आदेश जारी किए, वो ना तो उन आदेश को जारी कर सकता था और ना ही उसके इन आदेशों के बारे में उसने अपने विभागाध्यक्ष को जानकारी दी।

ये है पूरा मामला मुख्यालय में कार्यरत मैकेनिकल विभाग के मुख्य रोलिंग स्टॉक इंजीनियर (सीआरएसई) ने 12 जून को एक आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि जो भी कर्मचारी छुट्टी से नौकरी पर आएगा, उसे सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म भरना होगा और जांच कराकर डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देशों (क्वारैंटाइन) की पालन करना होगा।

साथ ही अगर कोई कर्मचारी आउट स्टेशन जाने के लिए छुट्टी पर जाएगा तो उसे ड्यूटी पर आने के बाद 14 दिन के लिए क्वारैंटाइन होना पड़ेगा और इस अवधि की छुट्टियां कर्मचारी के खाते से काटी जाएंगी। आदेश जारी होने के करीब 6 दिन बाद परेशान कर्मचारी रेलवे की एम्पलॉइज यूनियन (एनडब्लयूआरईयू) के समक्ष मामले को लेकर गए।

यूनियन के महामंत्री मुकेश माथुर ने इस संबंध में रेलवे के प्रिंसिपल सीएमई के समक्ष विरोध किया और आदेश वापस लेने की मांग की। तब इस बात का खुलासा हुआ कि जो आदेश सीआरएसई ने जारी किए हैं उसके बारे में विभाग प्रमुख यानी प्रिंसिपल सीएमई को पता ही नहीं है।

इस पर प्रिंसिपल सीएमई ने तुरंत आदेश जारी करने वाले अधिकारी (सीआरएसई) को आदेश निरस्त करने के निर्देश जारी किए। इसके बाद 18 जून को संबंधित अधिकारी ने एक आदेश जारी करते हुए पूर्व में निकाले गए आदेशों को रद्द मानने के निर्देश जारी किए।

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