भारतीय रेलवे – कोविड फंड में अब करोड़ों के घोटाले की आशंका, रेलवे विजिलेंस ने दिए जांच के आदेश

| June 30, 2020
प्रतीकात्मक तस्वीर

रेल डिवीजन फिरोजपुर में कोविड-19 फंड में से की गई खरीद-फरोख्त की परतें खुलती जा रही हैं। अमृतसर से जानकारों का कहना है कि महंगे दाम पर जरूरत से ज्यादा डस्टबिन, आक्सीजन सिलेंडर व पीपीई किट अस्पताल में दी गई है, जिनकी इतनी जरूरत नहीं है और रखने की भी जगह नहीं है।

इसी तरह जम्मूतवी, पठानकोट, जालंधर, फिरोजपुर, जालंधर कैंट व लुधियाना रेलवे अस्पतालों में सामग्री दी गई है, जबकि कोरोना बीमारी के दौरान इन अस्पतालों में आने वाले मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है, बल्कि उन्हें अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में रेफर कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक रेलवे अस्पतालों में सप्लाई किए गए ऑक्सीजन सिलेंडर का दाम कई गुणा बताया जा रहा है, जबकि बाजार में कीमत तकरीबन 4500 रुपये है। पीपीई किट और डस्टबिन के दाम भी बाजार से कई ज्यादा है। इसके अलावा अस्पतालों में दिए गए बायोडिग्रेडेबल बैगों के भी बहुत ज्यादा दाम वसूले गए हैं।


रेलवे अस्पतालों में दी जाने वाली सामग्री की खरीद-फरोख्त रेल मंडल कार्यालय फिरोजपुर के स्टोर विभाग से की गई है। रेलवे विजिलेंस या फिर सीबीआई निष्पक्ष तरीके से जांच करती है तो करोड़ों रुपये की हेराफेरी सामने आएगी। कुछ रेलकर्मियों का कहना है कि ये पैसा उनके एक दिन के वेतन का है, जिसमें सप्लायर कुछ अधिकारी मिलकर घोटाला कर रहे हैं।

फिलहाल नार्दर्न रेलवे विजिलेंस की एसडीजीएम चंद्रलेखा मुखर्जी ने घोटाले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारों का कहना है कि रेलवे विजिलेंस निष्पक्ष तरीके से जांच करे तो ये घोटाला करोड़ों का निकलेगा। कुछ अधिकारियों ने सप्लायरों के साथ मिलकर जरूरत से ज्यादा और महंगी सामग्री खरीद रेलवे अस्पतालों में दी है।

उधर, रेल डिवीजन फिरोजपुर यूआरएमयू के डिवीजनल सेक्रेटरी राजेश कुमार का कहना है कि कोविड-19 फंड में से जितनी सामग्री की खरीद-फरोख्त हुई है, उन सभी वस्तुओं के दामों की डीआरएम से लिस्ट लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि सामान के दाम बाजार से ज्यादा वसूलें गए हैं तो अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। ये पैसा रेलकर्मियों के एक दिन के कटे वेतन का है, इसका दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

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