रेलवे कर्मचारियों का मर्जर – मर्जर के हक और खिलाफ दो मत हुए कर्मचारी

| June 11, 2020
7th Pay Commission: These employees set to hit Indian Railways ...

रेलकर्मियों को बहु कौशल युक्त बनाने की सिफारिशें भी जल्द आएंगी॥ एक महीने पहले गठित की गई थी रेलकर्मियों को बहु कौशल युक्त बनाने की सिफारिशें वाली कमेटी॥ भारतीय रेलवे शीर्ष प्रबंधन के स्तर पर ही नहीं‚ बल्कि रोजाना के कामकाज को सीमित कर्मचारियों के जरिए कराने की जुगत में है। इस परिप्रेIय में विभिन्न विभागीय कामकाज को आपस में विलय करने की तैयारी की जा रही है। विलय के उपरांत कर्मचारियों को किस तरह से कुशल और कौशल युक्त बनाना है इस संबंध में जल्द ही रेलकर्मियों को बहु कौशल युक्त बनाने की सिफारिशें भी आने वाली है।

इन सिफारिशों को तैयार करने के लिए रेलवे बोर्ड़ ने एक समिति का गठन किया है। समिति की सिफारिश संबंधी रिपोर्ट अगले सप्ताह तक संभावित है। इस रिपोर्ट के साथ कर्मचारियों के काम के आधार पर विभागीय विलय का रास्ता साफ हो जाएगा॥। गौरतलब है कि रेलवे में शीर्ष प्रबंधन को सीमित करने के लिए एक झटके में ही विभिन्न कैड़रों को विलय कर इंडि़यन रेलवे मैनेंजमेंट सर्विस का फैसला ले लिया गया था। यह फैसला रेलवे के ग्रुप ए अधिकारियों के संबंध में था‚ जो शीर्ष पर रेलवे के कामकाज को नेतृत्व प्रदान करते हैं। कुछ इसी तरह से ग्रुप सी स्तर के कर्मचारियों के कामकाज के आधार पर विभागीय स्तर पर विलय करने के लिए एक ब्लू प्रिंट (खाका) तैयार किया गया है।

इस ब्लू प्रिंट में रेलवे के जमीनी स्तर पर प्वाइंट्स मैन से लेकर सेक्शन इंजीनियर‚ टिकट कलेक्टर से लेकर टिकट चेकिंग इंस्सपेक्टर‚ इले्ट्रिरशियन‚ फिटर‚ कारपेंटर‚ टेलीकॉम मेंटेनर‚ गेटमैन‚ चौकीदार‚ ट्रैकमैन‚ सफाईवाला‚ खलासी‚ शंटर‚ मेशन‚ पेंटर‚ सेक्शन ऑफिसर‚ सीनियर सेक्शन ऑफिसर‚ सहायक स्टेशन मास्टर‚ गार्ड़‚ टेंस क्लर्क‚ सेक्शन कंट्रोलर‚ कमर्शियल इंस्पेक्टर‚ इंक्वायरी एंड़ रिजवेर्ेशन क्लर्क‚ क्लर्कियल स्टॉफ‚ वेल्ड़र‚ क्रेन आपरेटर‚ सभी तकनीकी कर्मचारी‚ मशीन मैन‚ लॉरी चालक‚ ट्रक चालक‚ वॉयर मैन आदि अन्य कई तरह के कर्मचारियों का आपस में विभागीय विलय की योजना बनाई गई है।

इन कर्मचारियों को उनके पद के साथ अन्य विभागों में विलय करने के लिए तकनीकी‚ ट्रेनिंग‚ प्रोड़क्शन के आधार पर रास्ता खोजा जा रहा है। इसके लिए रेलवे बोर्ड़ ने गत आठ मई को एक रेलवे बोर्ड़ के कार्यकारी निदेशक (स्थापना) के संयोजन में आठ सदस्य समिति का गठन किया है इसमें सदस्य तौर पर परियोजना‚ वित्त आदि के निदेशालयों के कार्यकारी निदेशकों को शामिल किया गया है। समिति को एक महीने के भीतर उपरोक्त कर्मचारियों को बहु कुशल और कौशल किस तरह से बनाया जाए इस पर सिफारिशें देने को कहा गया है। इस परिप्रेIय में यदि कर्मचारियों का विलय किया जाता है तो उनके वेतन निर्धारण‚ पदोन्नति और मेडि़कल सुविधाएं किस तरह से तय होंगी। समझा जाता है कि आठ जून को समिति के गठन की अवधि पूरी हो जाएगी और कुछ दिनों में उसकी सिफारिशें रेलवे बोर्ड़ और रेल मंत्रालय के समक्ष होगी। इसके बाद रेलवे बोर्ड़ को निर्णय लेना होगा कि किस तरह कर्मचारियों को विभागीय स्तर पर विलय को लेकर आगे बढ़øा जाए॥।

रेलकर्मियों पर काम का बोझ बढ़ाने की तैयारीः शिवगोपालऑल इंडि़या रेलवे मेंस फेड़रेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने कहा कि रेलकर्मियों को विभागीय स्तर पर विलय करने की कोशिश जरूर की जा रही है लेकिन इससे कोई फायदा नहीं होने वाला है। यह प्रयास रेलकर्मियों पर काम का बोझ बढ़ने की तैयारी है। इससे रेलकर्मियों की संख्या कम करके आउटसोसिÈग को बढ़वा दिया जाएगा। जाहिर है रेलवे में ठेकेदारों भागीदारी बढ़ेगी और रेलवे की संरक्षा प्रभावित होगी। लिहाजा रेलकर्मियों और रेलवे के हित के खिलाफ प्रबंधन के किसी भी फैसले का विरोध किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रेलवे के शीर्ष प्रबंधन के जमीनी स्तर पर रेल परिचालन के लिए २४ घंटे काम करने वाले रेलकर्मियों के पदोन्नति और उनके लिए जरूरी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। प्वाइंट्स मैन और ट्रैक मैन को पदोन्नति को एलड़ीसी बनाने की लगातार मांग हुई‚ लेकिन पूरी नहीं हुई। १८०० ग्रेड़ पे को समाप्त कर सीधे १९०० ग्रेड़ पे करने का मामला अभी लंबित है। रेलकर्मियों के विभागीय विलय से रेलवे का हित नहीं होने वाला है। फेडरेशन कर्मचारियों के मांगों का लेकर जनजागरण अभियान चला रही है और आठ जून को रेलवे में हर स्तर पर प्रदर्शन होगा॥। 

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