केंद्र के खिलाफ रेल कर्मचारियों ने खोला मोर्चा – पुरानी पेंशन की बहाली, निजीकरण और महंगाई भत्ते के खिलाफ के खिलाफ

| June 5, 2020
Patna: East Central Railway Employees Union protests over various ...

केंद्र सरकार की श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ ईस्टर्न सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन जागरूकता सप्ताह मना रही है। रेल कर्मचारियों को जागरूक किया जा रहा है। केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए कर्मचारी यूनियन आठ जून को राष्ट्रव्यापी विरोध दिवस मनाए जाने की तैयारी में है। गुरुवार को किऊल स्थित यूनियन कार्यालय में यूनियन के अध्यक्ष दिनेश झा ने कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए कहा कि लॉकडाउन में रेलकर्मी लगतार अपनी डयूटी पर लगे रहे। रेल कर्मियों ने कोरोना वारियर्स के रूप में काम किया।

रेल परिचालन से लेकर स्टेशनों पर सैनिटाइजेशन के लिए दिन-रात लगे रहे। सचिव पी. सुबंधु ने कहा कि केंद्र सरकार से समझौते के बाद भी उनकी मांगें लंबित है। उल्टे मांगे पूरी करने के बजाय सरकार कर्मियों के डीए में कटौती कर रही है। जागरूकता सप्ताह के तहत पहली जून से कर्मचारी यूनियन द्वारा केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन प्रभावी बनाने के लिए रेल कर्मचारियों को एकजुट किया जा रहा है। यूनियन द्वारा लगातार रेलवे के विभिन्न कार्यालयों में कार्यरत कर्मचारियों को उनके अधिकार के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

ईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन की प्रमुख मांगों में सूचकांक वृद्धि के मुताबिक डीए का भुगतान, विपदा के समय काम करने वाले कर्मियों को भविष्य निर्माण एवं एनपीएस के बदले पुराने पेंशन स्कीम को लागू करने, लॉकडाउन अवधि में सभी श्रमिकों का वेतन भुगतान करने, ट्रांसपोर्ट एनाउंस,रनिग भत्ता एवं सीटीए सहित सभी भत्तों के नियमित भुगतान करने, मालिकों के हित श्रम कानून को वापस लेने सहित 16 सूत्री मांग शामिल है।

केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफईस्ट सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन शाखा गया द्वारा रेल कर्मचारियों के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया। इस अवसर पर गुरुवार को ईसीआरकेयू हाजीपुर जोन के सहायक महामंत्री मिथिलेश कुमार ने बताया कि रेलवे कर्मचारियों के बीच जून 8 जून तक जन जागरूकता अभियान का संचालन किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि एक ही कर्मचारी से कई -कई जगहों पर काम लिया जाएगा तथा नई भर्तियों पर भी इसका असर पड़ेगा। पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण के खिलाफ हम पहले से लड़ाई लड़ रहे हैं परंतु भारत सरकार पिछले दरवाजे से निजी करण की ओर अग्रसर है जो इस सेंट्रल रेलवे कर्मचारी यूनियन तथा ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन को बर्दाश्त नहीं है। शाखा अध्यक्ष अनिल कुमार सिन्हा ने बताया कि गया स्थित सभी कार्य स्थलों पर कर्मचारी यूनियन के प्रतिनिधि अलग अलग ग्रुपों में जाकर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए तथा करोना से बचाव का उपाय करते हुए रेल कर्मचारियों को केंद्र सरकार की

कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ जागरूक किया जा रहा हैं। बताया गया कि भारतीय रेल के कुछ कर्मचारियों में मल्टी स्किलिंग और मर्जर ऑफ़ कैडर को लेकर केंद्र सरकार की योजना बनाई जा रही है जिससे संपूर्ण भारतवर्ष में रेल कर्मचारियों की संख्या 13.26 लाख से घटाकर 10 लाख करने की नीति को अपनाया जा रहा है। जिसके कारण एक-एक कर्मचारी पर चार से पांच कर्मचारियों के कार्य के बराबर कार्य लिए जाने का बोझ बढ़ेगा।

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