प्राइवेट सेक्टर के सहयोग से रेलवे परियोजनाएं पकड़ेंगी रफ्तार, रेलवे सेफ्टी पर होगा पूरा जोर – रेल मंत्री

| May 27, 2020
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कोरोना काल के बाद भी रेलवे की परियोजनाएं बगैर किसी अवरोध के बदस्तूर जारी रहेंगी। कोच व वैगन निर्माण और आटोमैटिक सिगनल के उत्पादन में कोई कटौती नहीं होगी, बल्कि इनका काम और तेज होगाा। केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल का कहना है कि, ‘रेलवे की परियोजनाओं के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं पड़ने पाएगी। जरुरत पड़ने पर इसके लिए विदेशों से उधारी लेंगे।’

रेलवे की परियोजना को रफ्तार देने के लिए देश-विदेश के प्राइवेट सेक्टर का साथ लेंगे रेलमंत्री गोयल ने मंगलवार को यहां दावा किया ‘रेलवे की परियोजना को रफ्तार देने के लिए देश-विदेश के विशेषज्ञों और प्राइवेट सेक्टर का साथ लेंगे। परियोजनाएं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में चलाई जाएंगी।’ कोरोना संकट के दौरान भारतीय रेलवे की खराब हुई वित्तीय स्थिति में आगामी परियोजनाओं के जारी रखने को लेकर पूछे सवाल का विस्तार से जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा ‘रेलवे की सेफ्टी के लिए पूंजी निवेश में कोई कटौती नहीं की जाएगी। सिगनलिंग, कोच और अन्य सेफ्टी उपकरणों के निर्माण की परियोजनाएं रफ्तार पकड़ेंगी। फ्रेट कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं में निजी निवेश का साथ लेते रहेंगे।’

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए निजी क्षेत्रों के साथ मिलकर कई कारखानों की स्थापना की जा रही है भारतीय रेलवे में फिलहाल दो सबसे बड़ी परियोजनाएं ईस्टर्न व वेस्टर्न फ्रेट कारिडोर है। रेलवे की महत्वाकांक्षी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट है। इनमें तकरीबन दो लाख करोड़ रुपये का निवेश होना है। इनमें फ्रेट कारिडोर के लिए जहां जापान से बहुत सस्ता ऋण मिल रहा है तो वहीं बुलेट ट्रेन के लिए विश्व बैंक से मदद मिल रही है। रेलवे के इंजन, कोच, वैगन और अन्य उत्पादों के निर्माण के लिए निजी क्षेत्रों के साथ मिलकर कई कारखानों की स्थापना की जा रही है।

तेजस व वंदे भारत के साथ निजी निवेश भारतीय रेलवे में ट्रेनों के संचालन में भी तेजस व वंदे भारत के साथ निजी निवेश होने लगा है। निजी निवेश के सहारे इसे और आगे बढ़ाए जाने की योजना है। गोयल ने स्पष्ट तौर पर कहा कि पीपीपी मोड में निजी निवेश को बढ़ाकर रेलवे परियोजनाओं की रफ्तार को बनाए रखना उनकी प्राथमिकता होगी। रेलवे के आधुनिकीकरण में जरुरी कल पुरजों के कारखानों में प्राइवेट सेक्टर की भूमिका अहम हो सकती है। कोरोना संकट की वजह से उसके कामकाज पर कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा। प्राइवेट सेक्टर के सहयोग से ही विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन बनाने की परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।

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