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 यह लैपटॉप रेलवे की ओर से नहीं दिए जाएंगे। अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे खुद आउटलेट्स से डिवाइस की खरीद कर सकते हैं और उस पर रेलवे की ओर से रीइंबर्समेंट क्लेम किया जा सकता है।

रेलवे के अधिकारियों को बड़ी सुविधा देते हुए रेल मंत्रालय ने सभी को लैपटॉप देने का फैसला लिया है। रेलवे बोर्ड की ओर से जारी आदेश में सभी गजटेड यानी राजपत्रित अधिकारियों को लैपटॉप, नोटबुक, टैबलेट, नेटबुक, कम्प्यूटर, नोटपैड या फिर अल्ट्रा-नोट बुक जैसे गैजेट्स देने की बात कही गई है। बोर्ड की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि काम में लगातार हो रहे तकनीकी बदलावों के चलते यह फैसला लिया गया है। बोर्ड ने अपने आदेश में कम्प्यूटर से लेकर नोटपैड तक सभी डिवाइसेज को लैपटॉप माना है। आइए जानते हैं, रेलवे बोर्ड कैसे अधिकारियों को देने वाला है लैपटॉप की सुविधा और क्या होंगे नियम…

 किसी भी लैपटॉप की आयु रेलवे बोर्ड की ओर से 4 साल निर्धारित की गई है। इसका अर्थ यह है कि 4 सालों के बाद अधिकारी नई डिवाइस ले सकते हैं और पुरानी डिवाइस को अपने घरेलू काम में ला सकते हैं। इन लैपटॉप पर ह्रास लागू होगा, इसलिए समय के साथ उसकी मूल्य कम होती जाएगी।

 लैपटॉप को अधिकारी निजी काम के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते क्योंकि उसे आधिकारिक उपकरण माना जाएगा। यही नहीं यदि किसी अधिकारी की सर्विस दो साल या उसे कम भी बची है, तब भी वे लैपटॉप ले सकते हैं। लैपटॉप की देखरेख और डेटा की सुरक्षा की जिम्मेदारी पूरी तरह से अधिकारी की होगी।

 4 साल की अवधि पूरी होने के बाद लैपटॉप की कुल वैल्यू खरीद के 10 फीसदी के बराबर मानी जाएगी। उस मूल्य को चुकाने के बाद अधिकारी लैपटॉप अपने पास रख सकेंगे। उससे पहले वह सरकारी संपत्ति ही माना जाएगा।

 आदेश के मुताबिक यह लैपटॉप रेलवे की ओर से नहीं दिए जाएंगे। अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे खुद आउटलेट्स से डिवाइस की खरीद कर सकते हैं और उस पर रेलवे की ओर से रीइंबर्समेंट क्लेम किया जा सकता है।