चेहरे की पहचान से लगेगी रेलकर्मियों की हाजिरी

| May 16, 2020

राजधानी समेत देशभर में रेलवे अपने कर्मचारियों की हाजिरी अब चेहरे की पहचान (फेस रिकग्निशन) व वॉइस टेस्ट तकनीक की मदद से लगाने की संभावना तलाश रही है। उत्तर रेलवे दिल्ली मंडल के अधिकारियों के मुताबिक हाल ही में रेलवे बोर्ड से इस बाबत एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें ऐसा करने के बारे में सुझाव मांगे गए हैं।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक फेस रिकग्निशन व वॉइस टेस्ट तकनीक के अलावा ट्रांसपेरेंट डिस्पोजेबल हैंड ग्लब्स, आई स्कैनिंग के विकल्पों के बारे में रिपोर्ट देनी है।

गौरतलब है कि फिलहाल कोरोना संक्रमण के चलते रेलवे में बायोमैट्रिक हाजिरी व ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट अस्थायी रूप से बंद है। कोरोना के मद्देनजर लागू लॉकडाउन के दौरान करीब 50 दिन यात्री ट्रेन बंद रहने के बाद फिर चालू की गई हैं। अब जब ट्रेन के पहिए फिर पटरी पर हैं तो यात्री सुरक्षा के लिहाज से चालक दल व गार्ड आदि के ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट जरूरी हैं, जिससे उनके नशे में होने या न होने का पता चले।

अब जबकि कोरोना संक्रमण से बचाव के चलते ब्रेथ टेस्ट बंद हैं तो उसके विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। जिससे नियमों का भी पालन हो सके और संक्रमण फैलने के खतरे से भी बचा जा सके।

हर दिन 300 ट्रेनें चलाने को तैयार, लेकिन राज्य नहीं दे रहे साथ : पीयूष गोयल

प्रवासी कामगारों के पैदल घर जाने को लेकर गरमाई राजनीति के बीच रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस स्थिति के लिए राज्यों को जिम्मेदार ठहराया है। साथ ही कहा है कि वह हर दिन 300 ट्रेनें चलाने को तैयार हैं, लेकिन राज्यों की ओर इसकी अनुमति नहीं मिल रही है। इसके चलते कामगारों को यह कष्ट सहना पड़ रहा है। उन्होंने इस दौरान बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों के रवैये की जमकर आलोचना की और कहा कि इन राज्यों से अब तक सिर्फ कुछ ही ट्रेनों को चलाने की अनुमति मिली है।

पीयूष गोयल ने साफ किया कि अब तक एक हजार श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने की स्वीकृति मिली है, इनमें 932 ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। कुल चलाई गई श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में से 75 फीसद ट्रेनें उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए चलाई गई हैं। वहीं, बंगाल के लिए अब तक सिर्फ दो ट्रेनें चली हैं। गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद पांच और ट्रेनों को चलाने की अनुमति दी गई है।

साथ ही 15 जून तक यानी अगले 30 दिनों में 105 ट्रेनें चलाने की सूचना दी है। बावजूद इसके देशभर में अकेले बंगाल के करीब 40 लाख लोग बाहर रहते हैं जो इस संकट के समय अपने घरों को लौटना चाहते हैं, लेकिन बंगाल सरकार के इस रवैये से उन सभी को कष्ट उठाना पड़ रहा है। जिन 105 ट्रेनों को चलाने की बात कही है, वह भी अभी सिर्फ सूचना भर है। कोई ब्योरा नहीं दिया है। गोयल ने कहा कि ऐसी ही स्थिति झारखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान को लेकर भी है। जहां अब तक सबसे कम ट्रेनें चली हैं।

रेल मंत्री ने कहा कि वह प्रवासी कामगारों के घर नहीं लौट पाने और रास्ते में उन्हें हो रहे कष्टों से परेशान हैं, लेकिन राज्यों का रवैया ठीक नहीं है। इसके बाद भी वह सभी राज्यों से संपर्क में हैं। जिस भी राज्य से अनुमति मिलेगी, वह तुरंत ट्रेन रवाना कर देंगे। गोयल ने बताया कि गुरुवार को 145 स्पेशल ट्रेनें चलाई गई हैं। रेलवे सभी सुरक्षा मानकों के तहत यात्रियों की जांच करके इनका संचालन कर रहा है।

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