राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मजदूर इकाई भारतीय मजदूर संघ से लेकर अन्य ट्रेड यूनियनों ने पिछले दरवाजे से श्रम कानूनों में बदलाव का घोर विरोध किया है। यूनियनों ने उद्योगों की ईएसआईसी से कामगारों को तनख्वाह देने के प्रस्ताव का भी विरोध किया है। बीएमएस ने अपने राज्यों की इकाइयों की बैठक बुलाई है।

इस बैठक में सरकार के विरोध का रोडमैप तैयार किया जाएगा॥। दो दिन पहले मध्य प्रदेश सरकार ने और कल उत्तर प्रदेश सरकार ने विदेशी पूंजी निवेश को आकÌषत करने के लिए श्रम कानूनों में बदलाव कर दी है। अलबत्ता केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष गंगवार इस बात से इनकार कर रहे हैं कि सरकार कोई अध्यादेश लाने की तैयारी में है‚ लेकिन मजदूर यूनियनों की मानें तो केंद्र सरकार के कहने पर ही राज्य सरकारें अपने यहां कानूनों में बदलाव कर रही हैं‚ क्योंकि इस वक्त कोरोना का संकट चल रहा है और बहुत सारी कंपनियां चीन से बाहर निकलना चाहती हैं।

इन कंपनियों के लिए भारत को एक उपयुक्त स्थल बनाने के उद्देश्य से श्रम कानूनों में बदलाव किया जा रहा है॥। श्रम कानूनों में बदलाव से कारखानों में १२ घंटे की ड्यूटी‚ १०० कामगारों से कम वाले कारखानों या उद्योगों में कानूनों में ढील देना देना जैसे मुद्दा शामिल हैं। भारतीय मजदूर संघ के अध्यक्ष सीके साजिद नारायण ने राष्ट्र सहारा से कहा की हम इन प्रस्तावों का विरोध करते हैं। बीएमएस ने कल वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए अपनी राज्य इकाइयों की बैठक बुलाई है। इस बैठक में राज्य इकाइयों की तरफ से फीडबैक लिया जाएगा और फिर अगली रणनीति पर विचार किया जाएगा।

नारायण ने कहा की हमने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश का अध्यादेश का ड्राफ्ट मंगा लिया है। इसका अध्ययन कर रहे हैं और फिर औपचारिक तौर पर विरोध जताने के लिए सरकार को अपना मेमोरेंडम पेश करेंगे॥। केंद्र सरकार की कर्मचारियों और सरकार की संयुक्त मैकेनिज्म जेसीएम में स्टाफ साइड के सदस्य शिव गोपाल मिश्रा ने कहा कि हम इन बदलावों का विरोध करेंगे और विरोध के तरीके पर विचार करेंगे‚ क्योंकि अभी लॉकडाउन है इसलिए सड़कों पर नहीं उतरा जा सकता है‚ लेकिन हम जल्दी ही विरोध का तरीका ढूंढ लेंगे। मिश्रा ने कहा कि उद्योग जगत चाहता है कि कामगारों को वेतन ईएसआईसी से दिया जाए हम इसका भी विरोध कर रहे हैं‚ क्योंकि ईएसआईसी में जमा पैसा मजदूरों‚ उनके परिवार‚ उनकी बीमारी‚ दुर्घटना के समय में उनकी मदद के लिए होता है। अगर उद्योगों और कारखानों को एक बार अनुमति दे दी गई तो उन्हें इस फंड का बेजा इस्तेमाल करने का मौका मिल जाएगा॥।

मजदूर यूनियनों का कहना है कि कुछ और सरकारें भी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की तरह श्रम कानूनों में बदलाव करने की तैयारी कर रही हैं‚ इनमें तेलंगाना‚ आंध्र प्रदेश‚ उड़ीसा समेत कुछ और राज्य शामिल हैं॥। द रोशन॥ नई दिल्ली। एसएनबी॥ उत्तर प्रदेश‚ मध्य प्रदेश के बाद तेलंगाना‚ आंध्र प्रदेश और ओडि़शा भी श्रम कानून बदलने की तैयारी में॥ यूनियनों ने उद्योगों की ईएसआईसी से कामगारों को तनख्वाह देने के प्रस्ताव का भी किया विरोध॥ द रोशन॥ नई दिल्ली। एसएनबी॥ उत्तर प्रदेश‚ मध्य प्रदेश के बाद तेलंगाना‚ आंध्र प्रदेश और ओडि़शा भी श्रम कानून बदलने की तैयारी में॥ यूनियनों ने उद्योगों की ईएसआईसी से कामगारों को तनख्वाह देने के प्रस्ताव का भी किया विरोध॥