लॉकडाउन के दौरान मुख्यालय छोड़कर जाने वाले वैगन मरम्मत कारखाने के कर्मचारियों को ड्यूटी से अनुपस्थित माना जाएगा और इस अवधि में नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। कारखाना प्रशासन के इस आदेश के बाद संबंधित कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। वहीं, इस आदेश से रेलवे संगठनों में नाराजगी है।

कोरोना महामारी के चलते वैगन व कोच मरम्मत कारखाना बंद चल रहा है। लॉकडाउन के दौरान तमाम कर्मचारी अपने गृह जनपद चले गए थे। बीस अप्रैल से कारखाना खुलने की खबर मिलने पर ऐसे कर्मचारी वापस लौट आए। लेकिन कारखाना प्रशासन ने इसे गलत माना है। कारखाना प्रशासन ने 30 अप्रैल को आदेश जारी किया कि जो कर्मचारी लॉकडाउन की अवधि में मुख्यालय छोड़कर बाहर चले गए थे, उन्हें वर्क टू होम के तहत ड्यूटी पर नहीं माना जाएगा, क्योंकि वे मुख्यालय में उपलब्ध ही नहीं थे।

इन कर्मचारियों को 23 मार्च से 19 अप्रैल की अवधि तक अनाधिकृत तौर पर ड्यूटी से अनुपस्थित माना जाएगा और रेलवे के नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। वेतन न कटे, इसके लिए विशेष आकस्मिक अवकाश लेकर उनको छुट्टी कटवानी होंगी। मेडिकल प्रमाण पत्र लाने पर ही उनको ड्यूटी पर लिया जाएगा। जो कर्मचारी बबीना, दतिया, बरुआसागर, उनाव बालाजी एवं आसपास जगहों से कार्य पर आते हैं वे आवास भत्ता लेने के पात्र नहीं हैं। ऐसे कर्मियों का भी पता लगाया जाएगा। इस आदेश से कर्मचारियों में हड़कंप मचा है।

कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ सरकार कह रही है कि घर पर सुरक्षित रहो, वेतन नहीं कटेगा, दूसरी तरफ ऐसा आदेश हैरान करने वाला है।   – सरकार ने बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने की अनुमति नहीं दी है। कर्मचारी ड्यूटी पर हैं छुट्टी पर नहीं हैं। इसलिए यह आदेश जारी किया गया है। आरडी मौर्या, मुख्य कारखाना प्रबंधक। – लॉकडाउन के दौरान लोगों को घर में सुरक्षित रहना है। वे कहीं पर भी हों, ऐसे में इस तरह का आदेश कर्मचारी हित में नहीं है।


कर्मचारियों का अहित नहीं होने दिया जाएगा। वीजी गौतम, मंडल सचिव, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे इंप्लाइज संघ। – कारखाना प्रशासन का यह आदेश दुर्भाग्यपूर्ण है। किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं कटने देंगे और न ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होने देंगे। लॉकडाउन खुलने पर बात करेंगे। आरएन यादव, मंडल सचिव, नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन।