केंद्रीय कर्मचारियों के रोके गए महंगाई भत्ते पर चर्चा हुई तेज, जमकर हो रहा विरोध

| May 3, 2020
  • महंगाई भत्ते के मुद्दे पर जल्द बुलाई जा सकती है जेसीएम की बैठक॥
  • महंगाई भत्ते से रोक हटाने के लिए केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से लगातार किया जा रहा है अनुरोध॥
  • महंगाई भत्ते को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों की मुराद पूरी होने की उम्मीद लगाई जा सकती है। रोके गए महंगाई भत्ते को बहाल करने अथवा कर्मचारियों के पक्ष में कोई सार्थक रास्ता निकाला जा सकता है। इस मांग को लेकर नेशनल कौसिंल ज्वाइंट कंसलेटिव मशीनरी (जेसीएम) की बैठक बुलाई जा सकती है। ॥ जेसीएम कर्मचारी पक्ष की ओर से केंद्रीय मंत्रियों और प्रमुख प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार कर्मचारियों की भावनाओं और उनके क्रियाकलापों के बारे में अवगत कराया जा रहा है॥।

    केंद्र सरकार ने हाल ही में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को जनवरी २०२० से लेकर जून २०२१ तक रोक दिया है। इसको लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और खासकर रेलकर्मियों में क्षोभ है। केंद्रीय कर्मचारियों का सीधा तर्क है कि किसी गंभीर परिस्थितियों में वे कार्य करने को तैयार रहते हैं। कोरोना कहर के इस दौर में केंद्रीय कर्मचारियों और रेलकर्मियों ने अपनी सेवाएं देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़़ रखी है। इसके बावजूद उनके वास्तविक हक को रोका जा रहा है। इससे वेतनभोगियों और पेंशनभोगियों पर असर पड़़ रहा है। ॥

    इस मामले को केंद्र सरकार और कर्मचारी पक्ष के बीच विभिन्न मुद्दे के समाधान के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित नेशनल कौसिंल (जेसीएम) बैठक जल्द बुलाई जा सकती है। यह उम्मीद ऑल रेलवे मेंस फेड़रेशन के महामंत्री एवं जेसीएम (कर्मचारी पक्ष) के सचिव शिवगोपाल मिश्र ने भी जताई है। उनका कहना है कि अकेले रेलवे ही नहीं‚ बल्कि अन्य केंद्रीय कर्मचारियों जैसे पोस्टल‚ डि़फेंस‚ इनकम टैक्स एवं अन्य विभागों के कर्मचारियों में महंगाई भत्ते और पेंशनभोगियों में विरोध है। ॥

    महंगाई भत्ता रोके जाने के खिलाफ याचिका, सेना के रिटायर्ड अफसर पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

    • सेना के रिटायर्ड अफसर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया
    • कोरोना वायरस संकट में महंगाई भत्ता रोकना ठीक नहीं

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता रोकने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सेना के एक रिटायर्ड अफसर ने इस मुद्दे पर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है. दायर याचिका में महंगाई भत्ता कटौती के फैसले को वापस लेने के लिए कोर्ट की ओर से केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की गई है.

    सेवानिवृत्त मेजर ओंकार सिंह गुलेरिया ने यह याचिका दायर की है. कैंसर पीड़ित ओंकार सिंह गुलेरिया ने शीर्ष कोर्ट के समक्ष कहा है कि बीमार पत्नी के साथ किराये के घर में रहता हूं और मेरी आय का एक मात्र स्रोत मासिक सैन्य पेंशन है. ऐसे लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं जो पेंशन पर निर्भर हैं, लेकिन महंगाई भत्ता रोके जाने के केंद्र सरकार के फैसले से परेशान हैं.

    याचिकाकर्ता का कहना है कि जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस लोगों के लिए घातक साबित हो रहा है, खासकर बुजुर्गों के लिए तो ऐसे समय में महंगाई भत्ते में कटौती का फैसला उचित नहीं है. हम जैसे पेंशनभोगियों के लिए पेंशन ही एक मात्र सहारा है. याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री के उस बात का पालन करने का निर्देश दे, जिसमें उन्होंने कहा था कि, “वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल करें और वेतन में कटौती न करें, दूसरों की तुलना में वरिष्ठ नागरिकों के लिए कोविड-19 अधिक खतरनाक है.”

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