एक और गाज – केंद्रीयकर्मियों का यातायात भत्ता हो सकता है वापस!

| May 1, 2020

लॉकडाउन के दौरान ऑफिस नहीं गए केंद्र सरकार के कर्मचारियों का यातायात भत्ता वापस लेने के बारे में अभी केंद्र सरकार ने औपचारिक निर्णय नहीं लिया है‚ लेकिन कृषि मंत्रालय ने अपने कर्मचारियों का यात्रा भत्ता न देने का फैसला किया है। ॥

मंत्रालय ने उन कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करने की बात की है‚ जो बिना अनुमति के स्टेशन छोड़कर चले गए थे। केंद्र सरकार का नियम है कि यदि कोई कर्मचारी महीने में ३० दिन ऑफिस नहीं आता है तो उसे यातायात भत्ता नहीं मिलेगा। ॥ प्रधानमंत्री ने २४ मार्च को लॉकडाउन की घोषणा की थी। २६ मार्च से आपात सेवाओं को छोड़कर केंद्र सरकार के बाकी सभी दफ्तर बंद कर दिए गए। १४ अप्रैल से संयुक्त सचिव और उससे ऊपर के अधिकारियों को ऑफिस बुलाया गया और १५ अप्रैल से उपनिदेशक स्तर के सभी अधिकारियों को १००‡ हाजिरी के साथ और बाकी ३३‡ कर्मचारियों को रोस्टर ड्यूटी के आधार पर ऑफिस ज्वाइन करने को कहा गया। उपनिदेशक से लेकर संयुक्त सचिव तक के अधिकारी एक दिन छोड़कर ऑफिस जाने लगे‚ लेकिन उससे नीचे रैंक के कर्मचारियों को बहुत कम संख्या में ऑफिस बुलाया गया। ॥

वित्त मंत्रालय को अंतिम निर्णय लेना है कि कर्मचारियों को ट्रांसपोर्ट अलाउंस देना है या नहीं। वित्त मंत्रालय सूत्रों के अनुसार अभी कोई औपचारिक निर्णय नहीं हुआ है‚ लेकिन कृषि मंत्रालय ने निर्णय ले लिया है। मंत्रालय के चीफ कंट्रोलर ऑफ अकाउंट ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि इस महीने ट्रांसपोर्ट अलाउंस नहीं दिया जाएगा और जिन लोगों को दे दिया गया है उनसे रिकवरी की जाएगी। ॥

मंत्रालय ने यह भी लिखा है कि जो कर्मचारी बिना अनुमति के स्टेशन छोड़कर बाहर चले गए थे‚ उनकी भी सूची बनाएं और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बहुत से कर्मचारी होली की छुट्टियों में दिल्ली छोड़ कर बाहर चले गए थे‚ लेकिन लॉकडाउन के कारण वापस नहीं आ पाए। इससे वह ड्यूटी ज्वाइन नहीं कर पाए ऐसे कर्मचारियों की भी लिस्ट तैयार की जा रही है। मालूम हो कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को वेतनमान के हिसाब से ४ से ८००० के बीच ट्रांसपोर्ट अलाउंस मिलता है॥


बिना बताए स्टेशन छोड़ने वालों के खिलाफ होगी कार्रवाई ॥ कृषि मंत्रालय ने अपने कर्मियों का यातायात भत्ता वापस लिया॥

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