रेलवे में टिकेट की कालाबाजारी: RPF देशभर में साइबर सेल बनाकर कसेगा नकेल, IRCTC में रुकेगी सेंधमारी

| February 21, 2020

रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ई-टिकट कालाबाजारी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सफाए के लिए देशभर में साइबर सेल बना रहा है। अवैध सॉफ्टवेयर की मदद से देश-विदेश से आईआरसीटीसी की वेबसाइट में सेंधमारी कर कन्फर्म टिकट झटकने वालों की धरपकड़ के लिए पहली बार हैकिंग की दुनिया के दिग्गज सॉफ्टवेयर पेशेवरों की मदद ली जाएगी। दावा है कि आरपीएफ साइबर पेट्रोलिंग नेटवर्क बनने के बाद वेबसाइट में सेंधमारी पर अंकुश लग जाएगा।








रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि पिछले एक साल में आरपीएफ ने ई-टिकट कालाबाजारी से जुड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह के 60 सदस्यों को गिरफ्तार किया है, लेकिन इस गिरोह का सरगना हादिम अशरफ व टेक्निकल हेड गुरुजी आरपीएफ की पकड़ से दूर हैं। इनके नेपाल अथवा दुबई में होने की संभावना है। जबकि मास्टर माइंड गुलाम मुस्तफा पिछले दिनों पकड़ा गया। यह गिरोह अवैध सॉफ्टवेयर एएनएमएस की मदद से सालाना 1000 करोड़ से अधिक की काली कमाई कर रहा था। यह सिलसिला पिछले एक दशक से चल रहा है। बताया जाता है कि गुलाम मुस्तफा की सालाना कमाई 180 करोड़ रुपये थी। इसके एसबीआई में 2400 व ग्रामीण बैंकों में 600 खातों की जांच अभी चल रही है।




गिरोह के तार पाकिस्तान, बांग्लादेश, दुबई, सिंगापुर आदि से जुड़े हैं। काली कमाई से जुटाए गए धन का इस्तेमाल आंतकवाद, धनशोधन व गैरकानूनी गतिविधियों में हो रहा था। यह गिरोह नए-नए अवैध सॉफ्टवेयर विकसित करने में माहिर है। उन्होंने बताया कि अन्य गिरोह भी ई-टिकट कालाबाजारी में लिप्त हैं। इसलिए आरपीएफ ने हैदाराबाद, बेंगुलुरु, पुणे में साइबर सेल बनाने का काम शुरू कर दिया है। इसके पश्चात चरणबद्ध तरीके से दिल्ली, लखनऊ, जोधपुर, अहमदाबाद, मुंबई, कोलकाता, शिलांग सहित सभी बड़े शहरों में साइबर सेल खोले जाएंगे। खास बात यह है उक्त सेल में आरपीएफ, आईआरसीटीसी, क्रिस के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के अलावा देश-विदेश के दिग्गज पेशवरों को नियुक्त किया जा रहा है। यह पेशवर हैकिंग की दुनिया के नामचीन हैं। इससे एडवांस टिकट बुकिंग व तत्काल टिकट बुकिंग के समय सेंधमारी कर कन्फर्म टिकट झटकने वालों को पकड़ा जा सकेगा।




कालाबाजारी गिरोह का नेटवर्क
गिरोह का सरगना-डेवलपर हादिम अशरफ फरार है। इसके नीचे देशभर में 18 से 20 सुपर एडमिन हैं। इनके नीचे पैनल सेलर हैं। उनकी संख्या 200 से 300 है। पैनल सेलर ने देशभर में 20 हजार से अधिक एजेंट बना रखे हैं। अवैध सॉफ्टपेयर एएनएमएस के जरिए इनका जाल पूरे देश में फैला है। इनकी सालाना कमाई का ठीक-ठीक अंदाजा अभी आरपीएफ के पास भी नहीं है। रेलवे सालाना 55 हजार करोड़ की टिकट बिक्री से राजस्व जमा करता है। इसका 67 फीसदी हिस्सा ई-टिकट बुकिंग से आता है।

मामले दर्ज
वर्ष        मामले     गिरफ्तारी    एडवांस टिकट     प्रयुक्त टिकट    कीमत (रु.)
2018     2774      3159         30636              89316           16,40,87,191
2019     4197      4598         29879              161064          11,57,63,416

बॉक्स

आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने कहा, “साइबर सेल में बड़े पैमाने पर कंप्यूटर उपकरण सहित साइबर पेशेवरों को नियुक्त करने में थोड़ा समय लग रहा है। इसके बाद आईआरसीटीसी की वेबसाइट में सेंधमारी कर कन्फर्म टिकट की कालाबाजारी पर लगभग अंकुश लग जाएगा। आरपीएफ गिरोह के सरगना व तकनीक हेड की खोज में लगी है।”

Category: Indian Railways, News

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