भारतीय रेलवे का तेजस ट्रेनों की कमाई का खुलासा करने से इनकार

| February 19, 2020

भारतीय रेलवे की सहायक कंपनी इंडि़यन रेलवे कैटरिंग एंड़ टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत यह बताने से साफ इनकार कर दिया है कि तेजस ट्रेनें चलाने से उसे कितनी कमाई हो रही है। इस सिलसिले में मांगी गई जानकारी साझा नहीं किए जाने के पीछे आईआरसीटीसी की दलील है कि यह सूचना कम्पनी के वाणिज्यिक ब्योरे और व्यापार गोपनीयता (ट्रेड़ सीक्रेट) से जुड़़ी होने के चलते खुलासे के दायरे से कानूनन बाहर है। ॥ मध्यप्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़़ ने सोमवार को बताया कि उन्होंने १३ दिसंबर २०१९ को आईआरसीटीसी को सूचना के अधिकार के तहत अर्जी भेजकर जानना चाहा था कि रेल मंत्रालय के तहत आने वाले सार्वजनिक क्षेत्र के इस उपक्रम को तेजस ट्रेनें चलाने से कुल कितना राजस्व प्राप्त हुआ है और इस परिचालन से उसे कितना शुद्ध मुनाफा या घाटा हुआ हैॽ








गौड़़ ने बताया कि आईआरसीटीसी के एक केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने २७ दिसंबर २०१९ को यह कहते हुए उक्त जानकारी देने से इनकार कर दिया कि वर्ष २००५ के आरटीआई अधिनियम के तहत कमाई‚ मुनाफे और घाटे से जुड़़ा ब्योरा उन बिंदुओं की सूची में रखा गया है जिनके खुलासे से कानूनी छूट प्राप्त है। आरटीआई कार्यकर्ता ने बताया कि आईआरसीटीसी के इस जवाब को चुनौती देते हुए उन्होंने इसके खिलाफ अपील दायर की थी। लेकिन उन्हें जानकर गहरा धक्का लगा‚ जब आईआरसीटीसी के एक प्रथम अपील अधिकारी ने ११ फरवरी को दिये गये आदेश में सीपीआईओ के जवाब को सही ठहराया और उनकी अपील खारिज कर दी॥।




इस बीच देश के पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने कहा‚ अव्वल तो आईआरसीटीसी को स्पष्ट करना चाहिए था कि तेजस ट्रेनों के परिचालन से मिलने वाले राजस्व की जानकारी आरटीआई अधिनियम के किन प्रावधानों के तहत नहीं दी जा सकती। लेकिन उसने यह जानकारी देने से लगातार दो बार इनकार करते वक्त इन प्रावधानों का जिक्र ही नहीं किया। गांधी ने कहा‚ चूंकि आईआरसीटीसी देश में रेलवे क्षेत्र का अपने किस्म का अकेला सार्वजनिक उपक्रम है। इसलिये यह भी नहीं माना जा सकता कि तेजस ट्रेनों के परिचालन से मिलने वाले राजस्व की जानकारी देने से उसके प्रतिस्पर्धात्मक हितों को कोई नुकसान पहुंच सकता है।




पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त ने यह भी कहा की सरकारी क्षेत्र का कोई भी उपक्रम केवल यह कहते हुए आरटीआई आवेदक को जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकता कि मांगी गई सूचना उसके किसी आंतरिक मामले से जुड़़ी है। सभी सरकारी उपक्रमों को आरटीआई के तहत सार्वजनिक–निजी भागीदारी (पीपीपी) की परियोजनाओं की जानकारी भी साझा करनी चाहिये‚ क्योंकि इनमें करदाताओं का भी पैसा लगा होता है॥। आईआरसीटीसी की दलील‚ यह सूचना कम्पनी के वाणिज्यिक ब्योरे और व्यापार गोपनीयता से जुड़़ी होने के चलते खुलासे के दायरे से कानूनन बाहर है॥

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