रेल सेवा विलय के खिलाफ रेलवे अधिकारियों ने प्रधानमन्त्री को तीन बोरी पोस्टकार्ड भेजे

| February 16, 2020

भारतीय रेल में आठ सेवाओं का विलय करने के विरोध में प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को दो हजार ईमेल और तीन बोरे भरकर पोस्टकार्ड मिले हैं। ये बीते डेढ़ माह में मिले हैं। देशभर में डिविजन-जोनल कार्यालयों व सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत रेल अधिकारियों की ओर से पोस्टकार्ड व मेल भेजने का सिलसिला जारी है।








अधिकारियों का कहना है कि रेलवे में सुधार जरूरी है, लेकिन तकनीकी रूप से यह फैसला गलत है। इसे निरस्त किया जाए। निर्णय के विरोध में पूर्व रेल मंत्री, रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य एवं सांसद भी खड़े हैं। भारतीय रेल ट्रैफिक सर्विस ऑफिसर एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रेलवे की आठ सेवाओं को मिलाकर भारतीय रेल प्रबंधन सेवा (आईआरएमएस) बनाने के सरकार के फैसले से 8400 अधिकारी प्रभावित होंगे। इनमें से ट्रैफिक, अकाउंट, पर्सनल सेवा के अधिकारी सबसे अधिक प्रभावित होंगे। देशभर में 68 डिविजन, 17 जोन व 12 से अधिक सार्वजनिक उपक्रमों में तैनात अधिकारियों ने पीएमओ, रेलवे बोर्ड को तीन बोरे पोस्टकार्ड भेजे हैं। उनका कहना है कि विश्व की किसी भी रेलवे में एक सेवा का प्रावधान नहीं है।




उन्होंने बताया कि रेलवे की विशेषज्ञ समितियों ने भी आठ सेवाओं का विलय कर दो सेवा करने की सिफारिश की है। बजट सत्र में आठ सांसदों ने रेल मंत्री पीयूष गोयल से सेवा विलय के फैसले पर संसद में सवाल किए थे।

ये भी विरोध में




जेडीयू के सांसद मनोज झा व कांग्रेस सांसद सुरेश ने गोयल को पत्र लिख विलय का विरोध किया है। वहीं पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने ट्विटर पर फैसले को अव्यावहारिक बताया है। रेल यूनियन एआईआरएफ, एनएफआईआर व कई एसोसिएशन ने भी विरोध किया है।

Category: Indian Railways, News

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