रेलवे के सामने समस्या : निजी ट्रेन के लिए ड्राइवर-गार्ड की भर्ती बड़ी चुनौती

| January 12, 2020

रेलवे बोर्ड ने देश के सौ प्रमुख रेल मार्गों पर 150 निजी ट्रेन गैर-रेलवे स्टाफ (ड्राइवर-गार्ड) से चलवाने की योजना बनाई है। हालांकि, हाई स्पीड ट्रेन चलाने के लिए एक हजार ड्राइवर-गार्ड की भर्ती करना निजी ट्रेन संचालकों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। दरअसल, रेलवे एक्ट के तहत किसी ड्राइवर को 20 साल के अनुभव के बाद मेल-एक्सप्रेस ट्रेन चलाने की अनुमति दी जाती है। यही नहीं, मेल-एक्सप्रेस ट्रेन 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, जबकि निजी रेलगाड़ियां 160 किलोमीटर की रफ्तार से फर्राटा भर सकेंगी।








रेलवे और नीति आयोग की ओर से तैयार प्रस्ताव के तहत निजी ट्रेन संचालकों को 150 निजी ट्रेन चलाने के लिए कई प्रकार की छूट दी गई है। इसमें संचालक अपनी पंसद के स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव तय कर सकेंगे। भविष्य में वे ट्रेन में खुद के कोच लगा सकेंगे। टीटीई, सहायक स्टाफ सहित ट्रेन के ड्राइवर-गार्ड निजी संचालक के होंगे। निजी ट्रेन के चलने के 15 मिनट बाद तक उक्त रेल मार्ग पर रेलवे की कोई ट्रेन नहीं चलेगी। यही नहीं, निजी ट्रेन संचालक 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी ट्रेन चला सकेंगे।




हालांकि, ट्रेन चलाने के लिए ड्राइवर-गार्ड की भर्ती निजी संचालकों के लिए आसान नहीं होगी। दरसअल, विशेषज्ञों के मुताबिक रेलवे में ट्रेन चलाने की कला सिखाने के लिए कोई प्रशिक्षण केंद्र नहीं है। सहायक लोको पायलट को 45 मिनट के लिए ‘सिमुलेटर’ पर ट्रेन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके बाद वह लोको पायलट के सहायक के रूप में चुनिंदा रेलमार्ग पर 10 से 15 साल तक मालगाड़ी (अधिकतम रफ्तार 40 किलोमीटर प्रति घंटा) चलाना सीखता है। 5 से 10 साल ड्राइवर को पैसेंजर ट्रेन (110 किलोमटर प्रतिघंटा) चलाने को दिया जाता है। 20 साल या उससे अधिक का अनुभव होने के बाद ही उसे मेल-एक्सप्रेस और सुपरफास्ट ट्रेन चलाने की मंजूरी मिलती है।




शुरुआत में मेल-एक्सप्रेस (130 किलोमीटर प्रति घंटा) पर लोको पायलट (वरिष्ठ ड्राइवर) के सहायक के रूप में सहायक लोको पायलट ट्रेन चलता है। इसके बाद उसके हाथ में किसी मेल-एक्सप्रेस ट्रेन की कमान दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि निजी ट्रेन को 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर चलाने के लिए 20 साल लंबा तजुर्बा रखने वाले ड्राइवर की भर्ती करना निजी संचालकों के लिए बड़ी चुनौती साबित होगा। अनाड़ी ड्राइवर के हाथों में निजी ट्रेन सौंपना हजारों रेल यात्रियों की सुरक्षा से खिलावड़ करने के समान रहेगा।

क्या निजी चालकों पर लागू होगा रेलवे एक्ट?
-रेलवे ड्राइवर एसोसिएशन के संजय पांधी कहते हैं, लाल सिग्नल पार करने पर ड्रावर को नौकरी से निकालने का प्रावधान है। ड्राइवर की गलती से ट्रेन हादसा होने पर उस पर आपराधिक मामला दर्ज किया जाता है, जिसमें जेल का प्रावधान है। क्या निजी ट्रेन के ड्राइवर-गार्ड पर रेलवे एक्ट के नियम लागू होंगे? यही नहीं, ट्रेन में ड्राइवर-सहायक ड्राइवर के कौशल की निगरानी को लोको इंस्पेक्टर होते हैं। गड़बड़ी होने पर उन्हें ट्रेन से हटा दिया जाता है। इसके अलावा दिल्ली-आगरा के बीच 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेन चलवाने से पहले रेलवे आरडीएसओ लखनऊ में ड्राइवर का मनोवैज्ञानिक टेस्ट लेता है। पास होने पर ही ड्राइवर ट्रेन चला सकता है। निजी ट्रेन चलाने की योजना में संभवत: संचालकों के ड्राइवर-गार्ड का रेलवे की ओर से प्रमाणिकरण होगा और तभी ट्रेन चलाने की इजाजत दी जाएगी।

Category: Indian Railways, News

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