रेलवे के अधिकारीयों का प्रदर्शन – रेलवे में विभागों के विलय का 60 डिविजन के अधिकारियों ने जताया विरोध, सौंपा ज्ञापन

| January 10, 2020

रेल मंत्रालय द्वारा सभी विभागों के विलय के फैसले का रेलवे अधिकारियों ने विरोध किया है। मंत्रालय के फैसले का विरोध करते हुए एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि रेलवे सेवाओं का विलय करने से ट्रेन संचालन और सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विभाग के इस फैसले के खिलाफ 60 डिविजन के 13 सिविल सेवा अधिकारी ने मिलकल ये ज्ञापन दिया है।








अधिकारियों ने आगे सवाल करते हुए पूछा कि यदि असंतोष व्यक्त करने की अनुमति नहीं है तो विलय पर परामर्श को लोकतांत्रिक कैसे माना जा सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे में अलग-अलग विभागों में लगातार हो रहे कथित विवादों को खत्म करने के लिए रेल मंत्रालय ने ये प्रसातव पेश किया था।  इसी के बाद रेल मंत्रालय ने विभागों के विलय का फैसला लिया है। हालांकि, इसमें हेल्थ और सर्विस विभाग को शामिल नहीं किया जाएगा।




रेलमंत्री पीयूष गोयल ने फैसले के बारे में बताया कि 1905 में रेलवे में आठ सेवाओं के जरिए काम होता आया है। उन्होंने आगे कहा कि विभागों के बीच वर्चस्व की लड़ाई और गुटबाजी को बढ़ावा मिलने के कारण रेलवे की प्रगति पर असर पड़ने लगा था। इसी वजह से आठों विभागों को एक सेवा में मिलाकर आइआरएमएस (इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस) के रुप में नई केंद्रीय सेवा शुरु करने का फैसला लिया है।




बता दें कि रेलवे सर्विस में बस 1 ही कैडर मंत्रालय के इस फैसले के मुताबिक इंडियन रेलवे सर्विस में अब केवल एक ही कैडर होगा। फिलहाल, आठ कैडर हैं। इनमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, स्टोर, पर्सनल, ट्रैफिक, सविल इंजीनियरिंग सेवा के कैडर शामिल हैं। फिलहाल कैबिनेट को इसके लिए प्रसताव भेजा गया है।  प्रस्ताव में यह भी जानकारी दी गई है कि मेडिकल और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (आरपीएफ) को स्वतंत्र रखा जाएगा। इन विभागों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रसाव में रेलवे बोर्ड की संख्या को 8 से घटाकर 5 बोर्ड करने का फैसला किया गया है। अब ट्रैफिक, रोलिंग स्टॉक, इंजिनियरिंग और  ट्रैक्शन को हटाकर इनकी जगह ह्यूमन रिसोर्स,  बिजनेस डेवलपमेंट, फाइनेंस बोर्ड ही रहेंगे।

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