क्या एक पत्ते के कारण ट्रेन लेट हो सकती है, जी हाँ भारतीय रेलवे में ऐसा सम्भव है

| January 9, 2020

पश्चिम बंगाल से आनेवाली टेनों को बुधवार को दोहरी मार ङोलनी पड़ी। पहले हड़ताल से प्रभावित हुईं और फिर ओवरहेड तार पर केले के पत्ते गिरने से काफी देर तक ट्रेनों का परिचालन प्रभावित हुआ।

इस वजह से हावड़ा से धनबाद आनेवाली ब्लैक डायमंड एक्सप्रेस सुबह के बजाय दोपहर तीन बजे धनबाद आई। अप में लेट होने की वजह से बुधवार की शाम धनबाद से हावड़ा जानेवाली डाउन ब्लैक डायमंड एक्सप्रेस साढ़े चार के बदले छह बजे खुली। पश्चिम बंगाल से आनेवाली कई अन्य टेनें भी लेट से आईं।








रेल पीआरओ पीके मिश्र के अनुसार, हड़ताल के कारण डाउन में आनेवाली नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी, नई दिल्ली-सियालदह राजधानी लेट से पहुंची। भुवनेश्वर-धनबाद गरीब रथ का आगमन भी लेट से हुआ। डाउन में लेट होने से हावड़ा-जबलपुर शक्तिपुंज एक्सप्रेस, हावड़ा-कालका मेल भी बुधवार को लेट से खुलीं।




भुवनेश्वर राजधानी साढ़े नौ घंटे तो जोधपुर-हावड़ा सात घंटे लेट : टेनों पर कोहरे का सितम भी जारी है। बुधवार की शाम नई दिल्ली से गोमो होकर भुवनेश्वर जानेवाली राजधानी एक्सप्रेस साढ़े नौ घंटे लेट से खुली। देर रात ढाई बजे खुलने के कारण गुरुवार को यह टेन लेट आएगी।




जोधपुर से हावड़ा जानेवाली टेन लगभग सात घंटे खुलने के कारण बुधवार रात नहीं आई। यह टेन अब गुरुवार की सुबह आएगी। मंगलवार की रात आनेवाली जोधपुर-हावड़ा एक्सप्रेस भी लगभग 14 घंटे देर से पहुंची।

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