रेलवे कल्याणकारी से बनेगी बिज़नस इंडस्ट्री – रेलवे ने तैयार किया नया बिजनेस मॉडल

| January 3, 2020

रेलवे ने आधुनिकरण के लिए 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये जुटाने और खर्च करने का टारगेट रखा है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष विनोद कुमार यादव के मुताबिक, कोयले की ढुलाई रेलवे के लिए आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत थी। इससे 50 पर्सेंट रेवेन्यू आता था, लेकिन अब कोयले की खान के पास ही थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट के कारण लगातार इसमें कमी आ रही है। गिरते रेवेन्यू को दूर करने के लिए अब रेलवे ने नया बिजनेस मॉडल तैयार किया है।








नए बिजनेस मॉडल के तहत कारों की ढुलाई माल गाड़ियों से की जाएगी। यादव के मुताबिक, अगले 5 साल के अंदर रेलवे ने लक्ष्य तय किया है कि 50 पर्सेंट कारें ट्रेनों के जरिए पहुंचाई जाएं। अभी मुश्किल से 3-4 पर्सेंट ही पहुंचाई जाती हैं। इससे कोयले की भरपाई हो सकेगी। इसके अलावा कृषि से संबंधित उत्पादन, ग्रेनाइट और प्रॉडक्ट भी रेलवे के जरिए पहुंचाने का प्लान है। अभी रेलवे को यात्री किराये से करीब 45 हजार करोड़ की कमाई होती है। 1 जनवरी से जो किराया बढ़ा है उससे रेलवे को 2,300 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे। रेलवे का रेवेन्यू बढ़ाने के लिए पीपीपी मॉडल, प्राइवेट ट्रेनें सहित तमाम ऐसे प्रोजेक्ट शुरू किए जा रहे हैं जिसमें रेलवे को कम कीमत में ज्यादा मुनाफा होने लगे।




यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने और मॉर्डन इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने के लिए अब रेलवे नए बिजनेस मॉडल पर काम कर रहा है। नए बिजनेस मॉडल के जरिए रेवेन्यू जुटाकर नई ट्रेनें, आधुनिक रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में यात्रियों को आधुनिक किस्म की सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।




2030 तक नई ट्रेनें, मॉर्डन स्टेशन बनाने के लिए जुटाने हैं 50 लाख करोड़
रेलवे ने तैयार किया नया बिजनेस मॉडल

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