देबराय समिति ने दिया था रेलवे में दो सेवाओं का सुझाव, मगर सरकार ने सब को मर्ज किया

| December 31, 2019

रेलवे अधिकारियों के एक बड़े तबके ने बिबेक देबराय समिति का हवाला देकर रेलवे की आठ सेवाओं के एकीकरण का विरोध किया है। उनका कहना है कि देबराय का रेल सेवाओं को एक के बजाय दो सेवाओं, तकनीकी और गैर-तकनीकी में समेटने का सुझाव तर्कसंगत था। उसमें इंजीनियरिंग और सिविल सेवा परीक्षा से आने वाले अधिकारियों के बीच वरिष्ठता की समस्या को ध्यान में रखा गया था। एकीकरण में इसकी उपेक्षा की गई है जिससे आने वाले समय में नई परेशानी खड़ी होगी।








स्वयं देबराय ने भी एक साक्षात्कार में इन रेलवे अफसरों की चिंता को सही ठहराया है। उन्होंने कहा है कि दो सेवाओं का सुझाव उन्होंने रेलवे अफसरों की यूनियन से बातचीत के आधार पर ही दिया था। ज्यादातर अधिकारियों का मत था कि विभागों के बीच खींचतान पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे की आठ सेवाओं को दो सेवाओं-तकनीकी और गैर-तकनीकी में विलीन किए जाने की जरूरत है।




अभी तक रेलवे में अफसरों की भर्ती दो परीक्षाओं के माध्यम से होती रही है। एक सिविल सेवा परीक्षा से और दूसरी रेलवे इंजीनियरिंग सेवा के माध्यम से। सिविल सेवा से आने वालों में गैर इंजीनियर और इंजीनियर दोनों होते हैं। जबकि, इंजीनियरिंग सेवा से आने वाले सारे इंजीनियर होते हैं। यही वजह है कि रेलवे में इंजीनियरों की संख्या गैर-इंजीनियरों के मुकाबले ज्यादा है। ऐसा शायद यह मानकर किया गया था कि रेलवे का मुख्य कार्य ट्रेन चलाना है।




लेकिन, इंजीनियरिंग विशेषज्ञता की जरूरत प्राय: डायरेक्टर स्तर तक होती है। उसके उपरांत मुख्यत: प्रबंधकीय कौशल की आवश्यकता होती है। इसीलिए हमने दो सेवाओं की सिफारिश की थी। एकीकरण से अलग-अलग काडर वाले 8000 अधिकारियों की वरिष्ठता प्रभावित होने की समस्या से जूझना पड़ेगा। अधिकारी भले इस बात को खुलकर नहीं बोल रहे हैं, लेकिन यह उनकी मुख्य चिंता का विषय है। हालांकि, रेलवे बोर्ड चेयरमैन विनोद यादव बार-बार भरोसा दे रहे हैं कि किसी को कोई परेशानी नहीं होने दी जाएगी।

Category: News

About the Author ()

Comments are closed.