रेलवे कर्मचारियों के टीए, ट्रांसफर खर्च व ओटीओवरटाइम के पेमेंट में कटौती

| December 28, 2019

रेलवे अब यात्र भत्ता, ओवर टाइम और दूसरे भत्ते आसानी से नहीं मिलेंगे। लंबी कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उपलब्ध बजट के आधार पर ही भुगतान होगा। इतना ही नहीं, ऑन ड्यूटी कर्मचारियों के मुख्यालय से बाहर जाने और पोस्टिंग पर भी रोक लगा दी गई है। इसकी छूट केवल संरक्षा और परिचालन विभाग को मिलेगी। मुख्यालय से खर्च में कटौती के फरमान के बाद धनबाद रेल मंडल के वित्त विभाग ने सभी विभागों को पत्र जारी कर दिया है। पत्र जारी होते ही महकमा में हड़कंप मच गया है।








ओवरहेड तार में तकनीकी गड़बड़ी होने, विद्युत समस्या समेत अन्य कोई भी खराबी की खबर मिलते ही आन ड्यूटी कर्मचारी को उनके कार्य स्थल से बाहर भेज दिया जाता है। उदाहरण के तौर पर चंद्रपुरा में यदि रेलवे की कोई समस्या है, तो गोमो से कर्मचारी को उस समस्या के समाधान के लिए भेजा जाता है। डिवीजन की फाइल लेकर अलग-अलग विभागों के कर्मचारी रेल मुख्यालय हाजीपुर जाते हैं। इसके एवज में उन्हें टीए यानी यात्र भत्ता मिल जाता है।




ऐसे काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या सैंकड़ों में है और इसके लिए रेलवे को यात्र भत्ता के तौर पर बड़ी रकम चुकानी पड़ती है। दूसरी ओर, प्रोन्नति के बाद कर्मचारी को दूसरी जगह पोस्टिंग के लिए भी रेलवे पर खर्च का बोझ बढ़ जाता है। ओवरटाइम करने वालों को भी पगार के साथ अतिरिक्त पैसे देने पड़ते हैं। अब नई व्यवस्था लागू होने से इन तमाम खर्च में कमी आएगी। रेलवे के विभागीय सूत्रों का कहना है कि धनबाद रेल मंडल ने इस पर अमल शुरू कर दिया है और अब तक लगभग 40 फीसद तक खर्च में कमी लाई गई है।




जासं, धनबाद : रेल इंजीनियर्स की प्रोन्नति को अवरुद्ध रखने, उन्हें ग्रुप बी श्रेणी नहीं दिए जाने तथा ऑल इंडिया रेलवे इंजीनियरिंग फेडरेशन को मान्यता नहीं दिए जाने के विरोध में शुक्रवार को रेलवे के इंजीनियरों ने काला दिवस मनाया। धनबाद रेल मंडल के अलग-अलग डिपो सहित डीआरएम कार्यालय में काम करने वाले इंजीनियरों ने विरोध जताया। हालाकि प्रदर्शन के बजाय उनहोंने मौन विरोध किया और काला बिल्ला लगाकर अपने कार्यो में लगे रहे।

मौके पर पूर्व मध्य रेल इंजीनियर्स एसोसिएशन के जोनल अध्यक्ष एसके दुबे, मंडल अध्यक्ष आरके सिंह, सचिव पीके सिंह, डीके सिंह, रविंद्र शर्मा, पंकज कुमार, सोनू कुमार, साबिर अली, मणिकांत, संतोष कुमार आदि थे।रेलवे इंजीनियरों ने काला बिल्ला लगाकर किया काम

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