रेलवे का निजीकरण नहीं, सेवाएं आउटसोर्स – संसद में रेलमंत्री का ब्यान

| November 23, 2019

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि रेलवे का निजीकरण नहीं किया जा रहा है। यात्रियों को सहूलियत देने के लिए केवल कुछ सेवाओं की आउटसोसिर्ंग हो रही है। केंद्रीय रेलमंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान सदन को बताया कि एक अनुमान के अनुसार रेलवे को अगले 12 वषों में 50 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। सरकार के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल है इसलिए यह कदम उठाए जा रहे हैं।








गोयल ने शुक्रवार को संसद के शीत कालीन सत्र के पांचवें दिन कहा कि हर दिन बेहतर सेवाओं और रेलवे लाइनों के लिए सदस्य एक नई मांग लेकर आते हैं। इन्हें पूरा करने के लिए अगले 12 साल के लिए 50 लाख करोड़ रुपये देना सरकार के लिए आसान नहीं है। बजट से जुड़ी कई समस्याएं होती हैं जिन्हें निपटाने के उपाय करने होते हैं।

यात्रियों की बढ़ती संख्या के लिए हजारों नई ट्रेनें शुरू करने और अधिक से अधिक निवेश की आवश्यकता है। ऐसे में अगर निजी निवेशक सरकार के नेतृत्व में इस क्षेत्र में पैसा निवेश करना चाहते हैं तो इसमें क्या गलत है। विभाग का स्वामित्व सरकार के पास ही रहेगा। इसे निजीकरण नहीं कहा जा सकता, सिर्फ कुछ सेवाओं को आउटसोर्स किया जा रहा है।




राज्यसभा में शुक्रवार को चर्चा में हिस्सा लेते रेल मंत्री पीयूष गोयल ’ एएनआइ

वाणिज्यिक व आनबोर्ड सेवाएं आउटसोर्स

रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगाड़ी ने कहा कि रेलवे की सिर्फ वाणिज्यिक और आनबोर्ड सेवाओं को निजी क्षेत्र से आउटसोर्स किया जा रहा है। इसमें भी स्वामित्व पूरी तरह से रेलवे का होगा और इससे रेलवे कर्मचारी किसी तरह से प्रभावित नहीं होंगे। निजी क्षेत्र के आने से रोजगार और बढ़ेंगे।




बिहार में 55 रेल परियोजनाएं लंबित

रेल राज्यमंत्री ने कहा कि बिहार की रेल परियोजनाओं के लिए 4,093 करोड़ रुपये का धन आवंटित किया गया है। लेकिन इस बजट में 362 फीसद का इजाफा हुआ है। राज्य में 55 लंबित रेल परियोजनाओं पर कार्य जारी है। हाजीपुर-महुआ रेल लाइन की शुरुआत करीब 14 साल पहले हुए थी लेकिन कुछ कारणों से वह भी लंबित है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने लिखित जवाब में बताया कि महुआ से भगवानपुर-समस्तीपुर की नई लाइन के लिए सर्वे हो चुका है।

’>>योजना में शामिल होने के लिए भूमि का मालिक होना जरूरी

’>>राज्यों के चयनित किसानों को ही मिलता है इसका लाभ

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