‘वंदे भारत’ की तीव्रता ने अन्य ट्रेनों की गति पर लगाई लगाम

| November 14, 2019

देश की पहली स्वदेशी सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस ने बीते दस माह में 100 करोड़ का मुनाफा कमाया है लेकिन इसे समय से चलाने के लिए रोज राजधानी-शताब्दी समेत दर्जनभर ट्रेन जगह-जगह रोकनी पड़ रही है।

दिल्ली-वाराणसी के बीच चलने वाली ‘वंदे भारत’ एक्सप्रेस के लिए अप-डाउन में कम से कम 22-24 ट्रेन को रोकना पड़ता है। इनमें मालगाड़ियों के साथ ही मेमू, इंटरसिटी और एक्सप्रेस ट्रेन हैं। मुख्य रूप से मडुआडीह एक्सप्रेस और मगध एक्सप्रेस प्रभावित होती हैं। राजधानी-शताब्दी एक्सप्रेस भी इन प्रीमियम ट्रेन के रास्ते में आती है तो उसे भी रोक दिया जाता है। देश की पहली निजी ट्रेन तेजस एक्सप्रेस को निकालने के लिए यही तरीका अपनाया जाता है। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।











100 फीसदी समय पर वंदेभारत

वंदेभारत की रिकार्ड औसत रफ्तार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह तकरीबन रोज समय पर पहुंचती है। वहीं राजधानी, शताब्दी समयपालन पर खरी नहीं उतरी हैं। वंदेभारत दिल्ली से कानपुर के बीच महज चार घंटे लेती है वहीं, शताब्दी इतनी दूरी तय करने में पांच घंटे 10 मिनट लेती है। दिल्ली-वाराणसी के बीच वंदेभारत अन्य ट्रेन से 40 फीसदी अधिक रफ्तार से दूरी तय करती है।

वाराणसी | कार्यालय संवाददाता

वीवीआईपी ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस बुधवार को कानपुर से पहले पैसेंजर ट्रेन बन गई। उसके आगे पैसेंजर ट्रेन को रवाना कर दिया गया। इस नाते सेमी हाई स्पीड ट्रेन कैंट स्टेशन पर करीब डेढ़ घंटे लेट पहुंची। इस ट्रेन से आ रहे यात्रियों के परिजन और इससे नई दिल्ली जाने वाले यात्री स्टेशन पर दो घंटे बैठे रहे।

कई बार रुकी ट्रेन: वंदेभारत एक्सप्रेस के यात्रियों के मुताबिक कानपुर स्टेशन से करीब 25 किलोमीटर पहले ट्रेन पैसेंजर की गति से चलने लगी। बीच में कई बार रुकी भी। बताया गया कि वंदेभारत एक्सप्रेस के गुजरने से पहले कोई लोकल पैसेंजर ट्रेन इस रूट पर दौड़ा दी गई। आगे पैसेंजर, पीछे-पीछे वंदेभारत एक्सप्रेस चल रही थी।




कानपुर स्टेशन पर यह ट्रेन सुबह 10.10 बजे के बजाय एक घंटे 27 मिनट लेट 11.31 बजे पहुंची। कानपुर स्टेशन पर उक्त पैसेंजर रूकी तो वंदेभारत ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ सकी। हालांकि कानपुर में डेढ़ घंटे की जोर देरी हुई, वह प्रयागराज होते हुए वाराणसी कैंट स्टेशन तक बरकरार रही।

कैंट स्टेशन पर देर पहुंचने के कारण यह करीब एक घंटे 10 मिनट की देरी से शाम 4.10 बजे नई दिल्ली रवाना हुई।

100 फीसदी समय पर वंदेभारत

वंदेभारत की रिकार्ड औसत रफ्तार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह तकरीबन रोज समय पर पहुंचती है। वहीं राजधानी, शताब्दी समयपालन पर खरी नहीं उतरी हैं। वंदेभारत दिल्ली से कानपुर के बीच महज चार घंटे लेती है वहीं, शताब्दी इतनी दूरी तय करने में पांच घंटे 10 मिनट लेती है। दिल्ली-वाराणसी के बीच वंदेभारत अन्य ट्रेन से 40 फीसदी अधिक रफ्तार से दूरी तय करती है।

वीवीआईपी ट्रेन वंदेभारत एक्सप्रेस बुधवार को कानपुर से पहले पैसेंजर ट्रेन बन गई। उसके आगे पैसेंजर ट्रेन को रवाना कर दिया गया। इस नाते सेमी हाई स्पीड ट्रेन कैंट स्टेशन पर करीब डेढ़ घंटे लेट पहुंची। इस ट्रेन से आ रहे यात्रियों के परिजन और इससे नई दिल्ली जाने वाले यात्री स्टेशन पर दो घंटे बैठे रहे।

कई बार रुकी ट्रेन: वंदेभारत एक्सप्रेस के यात्रियों के मुताबिक कानपुर स्टेशन से करीब 25 किलोमीटर पहले ट्रेन पैसेंजर की गति से चलने लगी। बीच में कई बार रुकी भी। बताया गया कि वंदेभारत एक्सप्रेस के गुजरने से पहले कोई लोकल पैसेंजर ट्रेन इस रूट पर दौड़ा दी गई। आगे पैसेंजर, पीछे-पीछे वंदेभारत एक्सप्रेस चल रही थी।

कानपुर स्टेशन पर यह ट्रेन सुबह 10.10 बजे के बजाय एक घंटे 27 मिनट लेट 11.31 बजे पहुंची। कानपुर स्टेशन पर उक्त पैसेंजर रूकी तो वंदेभारत ट्रेन अपनी रफ्तार पकड़ सकी। हालांकि कानपुर में डेढ़ घंटे की जोर देरी हुई, वह प्रयागराज होते हुए वाराणसी कैंट स्टेशन तक बरकरार रही।

कैंट स्टेशन पर देर पहुंचने के कारण यह करीब एक घंटे 10 मिनट की देरी से शाम 4.10 बजे नई दिल्ली रवाना हुई।

100 फीसदी समय पर वंदेभारत

वंदेभारत की रिकार्ड औसत रफ्तार 100 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह तकरीबन रोज समय पर पहुंचती है। वहीं राजधानी, शताब्दी समयपालन पर खरी नहीं उतरी हैं। वंदेभारत दिल्ली से कानपुर के बीच महज चार घंटे लेती है वहीं, शताब्दी इतनी दूरी तय करने में पांच घंटे 10 मिनट लेती है। दिल्ली-वाराणसी के बीच वंदेभारत अन्य ट्रेन से 40 फीसदी अधिक रफ्तार से दूरी तय करती है।

मुआवजा भी मिलता तेजस एक्सप्रेसके एक घंटे लेट होने पर 100 रुपये और दो घंटे से अधि देरी पर 250 रुपये यात्रियों को मुआवजा दिया जाता है।
लागत से ज्यादा कमाया रेलवे के मुताबिक, वंदेभारत को बनाने में 96 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस ट्रेन ने दस महीने में ही अपनी लागत से ज्यादा कमाई कर ली है। यात्री बेहाल ‘ इंतजार में बैठे रहे यात्री, दो घंटे से अधिक करना पड़ा इंतजार ‘ कानपुर से पहले पैसेंजर ट्रेन को आगे कर दिया गया रवाना
मुआवजा भी मिलता तेजस एक्सप्रेसके एक घंटे लेट होने पर 100 रुपये और दो घंटे से अधि देरी पर 250 रुपये यात्रियों को मुआवजा दिया जाता है। लागत से ज्यादा कमाया रेलवे के मुताबिक, वंदेभारत को बनाने में 96 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस ट्रेन ने दस महीने में ही अपनी लागत से ज्यादा कमाई कर ली है।
यात्री बेहाल ‘ इंतजार में बैठे रहे यात्री, दो घंटे से अधिक करना पड़ा इंतजार ‘ कानपुर से पहले पैसेंजर ट्रेन को आगे कर दिया गया रवाना
मुआवजा भी मिलता तेजस एक्सप्रेसके एक घंटे लेट होने पर 100 रुपये और दो घंटे से अधि देरी पर 250 रुपये यात्रियों को मुआवजा दिया जाता है। लागत से ज्यादा कमाया रेलवे के मुताबिक, वंदेभारत को बनाने में 96 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस ट्रेन ने दस महीने में ही अपनी लागत से ज्यादा कमाई कर ली है।

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