ISRO के सैटेलाइट से मिलेगी ट्रेन की सटीक जानकारी

| October 15, 2019

सोमवार दोपहर 2.58 बजे रेलवे के कंट्रोलर कपिल देव का पूरा ध्यान पठानकोट-दिल्ली के बीच चलने वाली सुपरफास्ट ट्रेन नंबर 22430 पर है. ट्रेन कुछ मिनट पहले ही करनाल स्टेशन से आगे बढ़ी है. दिल्ली के कंट्रोल रूम से कपिल और पानीपत जंक्शन के बाहर ट्रैक को मेंटेन करने से संबंधित काम कर रहे रेलवे कर्मियों के लिए अगले आधे घंटे बहुत महत्वपूर्ण हैं. पानीपत पहुंचने से पहले ट्रेन चार छोटे स्टेशन बाजिदा, घरोंदा, कोहंद और बाबरपुर पार करेगी. यहां ट्रैक की मरम्मत का काम करने वाले लोगों को ब्लॉक के लिए कहा गया है.








इसका मतलब यह भी है कि जब तक ब्लॉक लागू रहेगा, रेल पटरी के उस हिस्से पर कोई ट्रेन नहीं दौड़ेगी.

इसके बाद कंट्रोल रूम से कपिल ने पानीपत के स्टेशन मास्टर से बात की. अपने डैशबोर्ड पर उनकी नजर कायम थी. इसमें अलग-अलग रंग के संकेतक ट्रेन के मूवमेंट की पल-पल की खबर दे रहे थे. बात करने के बाद उन्होंने पानीपत के पास 15 मिनट के ब्लॉक की मंजूरी दी. देश भर में रेलवे के 350 सेक्शन कंट्रोल हैं जिसमें कपिल जैसे अधिकारी बेहतर सटीक तरीके से रेल को चलाने के फैसले ले रहे हैं. इस कामकाज में उनकी मदद इसरो का गगन कर रहा है. गगन वास्तव में GPS एडेड GEO ऑगमेंटेड सिस्टम है. शुरुआत में इसे वायु क्षेत्र के लिए डेवलप किया गया था, लेकिन अब यह हर 30 सेकेण्ड में ट्रेन की स्पीड और लोकेशन की जानकारी शेयर करता है.




अब रेलवे के कंट्रोलर को किसी मैन्युअल डेटा की जरूरत नहीं पड़ती. उसके पास समय पर रेलवे से जुड़ी हर छोटी-बड़ी सूचना पहुंच रही है और रेलवे के प्रभावी संचालन की योजना बनाने के लिए उनके पास पर्याप्त समय है.

इस सिस्टम से भारतीय रेलवे की लेट लतीफी की समस्या सुधर सकती है. अब यात्रियों को ट्रेनों की हर सेकेंड की लोकेशन और भी ज्यादा आसान और प्रकार से मिल रही है. रेलवे मंडल के इसरो के उपग्रह से जुड़े ट्रेन टाइम इंफॉरमेशन सिस्टम (आरटीआईएस) ने काम करना शुरू कर दिया है.




ट्रेन के आवागमन की सूचना प्राप्त करने और कंट्रोल चार्ट में दर्ज करने के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के उपग्रह आधारित रियल टाइम ट्रेन इंफरमेशन सिस्टम का उपयोग नए साल के साथ ही शुरू कर दिया था.

रेलवे के करीब 12,000 इंजन में से आधे में रियल टाइम ट्रेन इन्फोर्मेशन सिस्टम लगाया गया है. यह गगन पेलोड्स वाले जीसैट सैटेलाइट के जरिये सिग्नल प्रसारित करता है. जनवरी से अब तक इस सिस्टम पर 120 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं.

रेलवे नेटवर्क हुआ आधुनिक

नई प्रणाली से रेलवे को अपने नेटवर्क में ट्रेनों के संचालन के लिए अपने कंट्रोल रूम, रेलवे नेटवर्क को आधुनिक बनाने में मदद मिल रही है. इसमें आरटीआईएस युक्ति (डिवाइस) से इसरो द्वारा विकसित किए गए गगन जियो पोजीशनिंग सिस्टम से जोड़ा गया है. यह डिवाइस ही ट्रेनों की चाल और पोजीशन के बारे में बता रही है.

पांच तरह की मिल रही है जानकारी

सूचना और तर्क के अनुप्रयोग पर आधारित युक्ति डिवाइस ट्रेनों के आवागमन से संबंधित आगमन, प्रस्थान, तय की गई दूरी, अनिर्धारित ठहराव और सेक्शन के बीच की जानकारी पहुंचा रही है. यह इसरो के एस-बैंड मोबाइल सैटेलाइट सर्विस के माध्यम से सीआरआईएस डाटा सेंटर के माध्यम से सेंट्रल लोकेशन सर्वर तक ला रही है.

Source:- Economics Times

Category: News

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