इमिग्रेशन कानून में बदलाव की तैयारी: विदेश में नौकरी या पढ़ाई, सरकारी रेटिंग देगी भरोसा

| September 16, 2019

सरकार विदेश जाने, वहां बसे भारतीयों को हर जरूरी सुविधा देने और संकट में उनकी जल्द मदद करने के उद्देश्य से नया कानून बना रही है। इसके लिए इमिग्रेशन कानून में बदलाव की तैयारी है।
हाइलाइट्स

  • इमीग्रेशन कानून में होगा बदलाव, सरकार एजेंसियों को रेटिंग देने की तैयारी में
  • नौकरी या पढ़ने के लिए विदेश भेजे जाने वाली एजेंसी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा
  • सरकार उनके काम के हिसाब से रेटिंग देगी, फ्रॉड होने कम होंगे
  • रेटिंग सरकार देगी, इसलिए बेहतर रेटिंग वाली एजेंसी पर लोग भरोसा कर सकते हैं

नई दिल्ली:- अगर किसी शख्स को नौकरी या पढ़ाई करने के लिए विदेश जाना है, और इस बारे में सही जानकारी उसे न हो, तो वह बेहतर रेटिंग वाली एजेंसी की मदद ले सकेगा। बेहतर रेटिंग वाली एजेंसी पर लोग इसलिए भरोसा कर सकते हैं क्योंकि वह रेटिंग सरकार की ओर से दी गई होगी।
सूत्रों के अनुसार, कुछ बड़े बदलावों के साथ कानून मंत्रालय ने नए इमिग्रेशन कानून को हरी झंडी दे दी है। अब इस बिल पर कैबिनेट की मुहर लगनी है। इसके बाद सरकार की मंशा संसद के शीतकालीन सत्र में इसे पास कराने की है।








अलग अथॉरिटी बनेगी
नए कानून के प्रभाव में आने के बाद देश में इमिग्रेशन से जुड़े तमाम मसलों को सुलझाने के लिए अलग से ऑथिरिटी बनाई जाएगी। इमिग्रेशन मैनेजमेंट अथॉरिटी के लिए नया सिस्टम डिवेलप किया जाएगा। विदेश मंत्रालय के मातहत आने वाले इस आथॉरिटी को सेक्रेटरी स्तर का अधिकारी करेगा।




कानून कड़े किए गए
सरकार का कहना है कि इस बिल का उद्देश्य विदेश में बसे स्टूडेंट या काम करने गए भारतीयों को आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाना है। इसके लिए बिल में कई प्रावधान किए गए हैं। बता दें कि भारत से सालाना लगभग तीन करोड़ लोग विदेश जाते हैं। इनमें पढ़ाई, सैर-सपाटा से लेकर नौकरी और उद्योग-धंधे तक की जमात शामिल है। नए कानून में कबूतरबाजी के खिलाफ बहुत कठोर प्रावधान किए गए हैं। ऐसे रैकेट में लगे लोगों को उम्र कैद तक देने की बात कही गई है।




ये हैं नए बदलाव
-नौकरी या पढ़ने के लिए विदेश भेजे जाने वाली एजेंसी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। सरकार उनके काम के हिसाब से रेटिंग देगी, जिससे जरूरतमंद फ्रॉड से बचने के लिए बेहतर एजेंसी का चयन कर सकें। सभी एजेंट को इसके तहत खुद को रजिस्टर्ड करवाना होगा।

-विदेश गए सभी कामगार या स्टूडेंट का एक बड़ा ऑनलाइन डेटा बेस होगा, जिनके बारे में सारी सूचनाएं एक जगह होंगी। इससे आपात स्थिति में उनसे संपर्क करने में मदद मिलेगी। हालांकि ऐसे लोग जिनकी सूचना सार्वजनिक करना हित में नहीं है, उन्हें इससे अलग रखा जाएगा।

-किसी के विदेश जाने से पहले उनकी सोशल सिक्युरिटी जरूरत पूरा करने के लिए अलग डेस्क बनेगा जो हर जरूरत सूचना देगा और सुविधाएं भी उपलब्ध कराएगा।

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