ट्रेनों का संचालन सुनिश्चित करने को रेलवे कर्मचारी ने पानी में बिताए 16 घंटे, रेल मंत्री ने की तारीफ

| September 8, 2019

मुंबई में भारी बारिश की वजह से अस्त-व्यस्त रेल सेवाओं के बीच स्थानीय ट्रेनों का सुगम संचालन सुनिश्चित करने वाले रेलवे के एक इंजीनियर की बुधवार को रेलमंत्री पीयूष गोयल ने तारीफ की। पश्चिमी रेलवे के एक अधिकारी के अनुसार, इंजीनियर हरीश राठौड़ ने बुधवार को अंधेरी और वसाई स्टेशनों के बीच पटरियों पर जलस्तर की निगरानी करने और उसे हटाने के लिये करीब 16 घंटे बाढ़ के पानी में बिताए।







अधिकारी ने कहा कि मूसलाधार बारिश के दौरान राठौड़, रेलवे पटरियों को साफ करने और जमा पानी को बाहर निकालने के लिए शहर के नगर निकायों के साथ सहयोग करते रहे।

गोयल ने ट्वीट किया, मुंबई में भारी बारिश के बीच स्थानीय ट्रेनों का सुगम संचालन सुनिश्चित कaरने के लिये 16 घंटे बाढ़ के पानी में बिताने वाले रेलवे इंजीनियर हरीश कुमार राठौड़ और उनकी टीम को सलाम। यह एक बढ़िया उदाहरण है कि किस तरह यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रेलवे कर्मचारियों ने सबकुछ दांव पर लगा दिया।’

वसई और विरार के बीच सीजन में दूसरी बार ट्रेनें ठप पड़ जाने से रेलवे की परेशानियां बढ़ चुकी हैं। नालासोपारा में पटरियों पर 120 मिमी तक पानी होने के कारण बुधवार को सेवाएं ठप पड़ गई थीं। गुरुवार को भी इसके कारण कुछ मेल-एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। इस दौरान रेलवे के कई कर्मचारी घंटों तक मुंबई को ‘बचाने’ में लगे रहे।




जलस्तर जानने के लिए ‘जलमग्न’

पश्चिम रेलवे में भाईंदर के सीनियर सेक्शन इंजिनियर हरीश कुमार राठौड़, उनकी टीम के 8 कर्मचारी और 55 ट्रैक मरम्मत करने वाले 16 घंटों तक पानी में खड़े रहे। राठौड़ की टीम का काम था पटरियों पर पानी के स्तर का अपडेट कंट्रोल रूम तक देना। इसके लिए अलग-अलग स्थानों पर उनके कर्मचारी पानी में खड़े रहे और जलस्तर की स्थिति कंट्रोल रूम तक पहुंचाते रहे, ताकि ट्रेन चलाने का निर्णय लिया जा सके।

रेलवे कर्मचारियों की ‘डबल’ ड्यूटी
वसई-विरार सेक्शन में जलस्तर का पता लगाने वाले कर्मचारियों को रेलवे कंट्रोल रूम तक अपडेट देने के अलावा एक ओर ड्यूटी करनी पड़ रही थी। इस बार वसई-विरार मनपा से भी तालमेल बिठाकर काम किया जा रहा था। ट्रैक पर जलस्तर बढ़ने के स्थिति में कर्मचारियों को पंप द्वारा पानी निकालने की ड्यूटी दी गई थी, लेकिन वसई-विरार मनपा क्षेत्र में ही स्थिति खराब होने के चलते ऐसा संभव नहीं हो रहा था। ऐसे में कर्मचारियों को मनपा से अपडेट लेकर निर्णय लेना था।




आरपीएफ जवान बने ‘रक्षक’
जहां पश्चिम रेलवे में कर्मचारी जलस्तर का पता लगाकर लोकल ट्रेनों को चलाने की जुगत में थे, तो मध्य रेलवे पर कुर्ला, दादर और सायन में आरपीएफ के जवानों ने पानी में उतरकर लोगों को बचाने का प्रयास किया। पानी का स्तर बढ़ने के बाद कुर्ला से सीएसएमटी तक ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया। ऐसे में आरपीएफ जवानों को निर्देश दिया गया कि ट्रेनों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाए। मध्य रेलवे पर कुर्ला और दादर आरपीएफ के जवानों ने ट्रेनों में फंसे करीब 200-300 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।

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