सरकार का सख्त संदेश- नहीं चलेगा भ्रष्टाचार, 22 अधिकारी जबरन किए गए रिटायर

| August 27, 2019

सरकार ने भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में टैक्स विभाग के और 22 अधिकारियों को ‘जबरन’ सेवानिवृत्त किया है. भ्रष्ट अधिकारियों पर शिकंजा और कसते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने भ्रष्टाचार पर मुख्य नियम 56 (जे) के तहत इंस्पेक्टर स्तर के 22 अधिकारियों को भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है.








सीबीआईसी ग्लोबल स्तर पर जीएसटी और आयात टैक्स कलेक्शन की निगरानी करता है. इस साल जून से तीसरी बार भ्रष्ट टैक्स अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है. इससे पहले भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 27 उच्चस्तर के अधिकारियों को इसी नियम का इस्तेमाल करते हुए अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्ति दी गई थी. इनमें से 12 अधिकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के थे.




ईमानदार टैक्सपेयर्स को परेशान भी किया 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर अपन भाषण में कहा था कि कर प्रशासन में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए ईमानदार टैक्सपेयर्स को परेशान किया है. एक सूत्र ने कहा कि हमने हाल में अनिवार्य रूप से उल्लेखनीय संख्या में टैक्स अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्त किया है. हम इस तरह का बर्ताव कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, जिन अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त किया गया है उनमें 11 नागपुर और भोपाल क्षेत्र के हैं. इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने इंदौर की एक कंपनी द्वारा गैरकानूनी तरीके से सिगरेट विनिर्माण को मंजूरी दी थी.




भ्रष्‍टाचार से यौन उत्‍पीड़न तक के आरोप

चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, मेरठ और चंडीगढ़ क्षेत्र के भी एक-एक और मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु के दो-दो अधिकारियों को सेवानिवृत्त किया गया है. जून में सरकार ने सीबीआईसी के 15 आयुक्त स्तर के अधिकारियों को भ्रष्टाचार, रिश्वत लेने और देने, तस्करी और आपराधिक साजिश के आरोपों में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया था.

वहीं, उससे पहले सरकार ने 12 वरिष्ठ आईआरएस अधिकारियों को भ्रष्टाचार, यौन उत्पीड़न, आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों में अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किया था.

सीबीआईसी ने जिन अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की है उनमें अधीक्षक और ऐप्राइजिंग ऑफिसर रैंक स्तर के अधिकारी शामिल हैं। इनमें केके उइके, एसआर परते, कैलाश वर्मा, केसी मंडल, एमएस डामोर, आरएस गोगिया सहित अधिकारी विभिन्न केंद्रीय जीएसटी क्षेत्रों में कार्यरत थे।
पिछले दिनों केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा कई अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों को अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए जाने के आदेश दिए गए थे। जबकि कुछ अन्य अफसरों को अनियमितताओं, आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूछताछ का सामना करना पड़ा था।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आयकर अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की शिकायतों को देखते हुए फैसला किया है कि एक अक्तूबर से आयकर नोटिस ऑनलाइन जारी होंगे। यानी आयकर अधिकारी अब मनमर्जी से नोटिस नहीं दे पाएंगे।

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