16 ट्रेन ड्राइवरों ने ऑपरेशन कर आंखें कमजोर करवा लीं, ताकि बाबू का काम मिल जाए और 30% सैलरी भी बढ़ जाए

| August 10, 2019

ऑफिस में काम से बचने का बहाना तो शायद हर कर्मचारी ने कभी न कभी बनाया ही होगा, मगर रेलवे के ट्रेन ड्राइवरों का बहाना शायद सबसे अनोखा है। 16 ट्रेन ड्राइवरों ने जब 5-7 साल पहले नौकरी शुरू की थी तो मेडिकल जांच में उनकी आंखों की रोशनी बिल्कुल ठीक थी। मगर अब हुई मेडिकल जांच में सबकी दृष्टि थोड़ी कमजोर पाई गई।








नियमत: ड्यूटी पर आंखों की रोशनी कम होने की वजह से इन ड्राइवरों को न सिर्फ लिपिक कार्य दिया जाना था, बल्कि 30% की वेतन बढ़ोतरी भी मिलनी थी। मगर जब रेलवे कार्मिक विभाग ने इन ड्राइवरों की और गहन जांच करवाई तो पता चला कि सभी ने लेसिक लेजर ऑपरेशन के जरिए जानबूझकर आंखें कमजोर करवाई हैं। यानी आराम की नौकरी और बढ़ी हुई तनख्वाह के लिए इन ड्राइवरों ने विभाग को धोखा देने का प्रयास किया। रांची रेल डिवीजन के सीपीआरओ नीरज कुमार ने बताया कि इनको मेजर चार्जशीट दे जांच शुरू की गई है।




हर चार साल में होती है जांच

प्रत्येक चार साल में रेलवे ट्रेन ड्राइवराें का पीरियोडिकल मेडिकल एग्जामिनेशन (पीएमई) करता है। इसमें आंखों की जांच भी की जाती है। सबसे पहले यह खुलासा खड़गपुर रेल डिवीजन में रेलवे के डॉक्टर ने किया। डॉक्टर को शक हुआ तो उसने इनको जांच के लिए दक्षिण-पूर्व रेलवे मुख्यालय भेज दिया। वहां की जांच में भी जब स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो कोलकाता के एक निजी अस्पताल में भेजा गया। यहां जांच में पता चला कि इन ट्रेन ड्राइवरों ने लेसिक लेजर ऑपरेशन से आंखों का पावर कम करवाया है। इसके खुलासे के बाद रेलवे बोर्ड ने दक्षिण-पूर्व रेलवे जाेन के सभी ट्रेन ड्राइवराें की आंखाें की जांच शुरू करवा दी। रांची, चक्रधरपुर, आद्रा, खड़गपुर में ऐसे कई केस मिले। सभी को ऑपरेशनल ड्यूटी से हटा दिया गया।




नियुक्ति के समय ठीक थीं आंखें
लोको पायलट यानी ट्रेन ड्राइवरों की नियुक्ति के समय पूरी मेडिकल जांच होती है, जिसमें आंखों की भी जांच की जाती है। सिर्फ ए-1 आई साइट कैटेगरी में आने वालों को ही लिया जाता है। नियम ये है कि यदि ड्यूटी में ड्राइवर की दृष्टि कमजोर होती है तो उसे लिपिक कार्य दिया जाता है। साथ ही 30% वेतन वृद्धि भी मिलती है।

बड़ा सवाल

रेलवे ने उन डॉक्टरों पर कोई कदम उठाने की बात नहीं की है, जिन्होंने ऑपरेशन कर इन ट्रेन ड्राइवरों का साथ दिया। जब ड्राइवरों पर कार्रवाई हो रही है, तो डॉक्टरों को भी सजा मिलनी चाहिए।

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