ट्रैक पर दौड़ते हुए ‘गायब’ हो गई जनता एक्सप्रेस, मचा हड़कंप

| August 2, 2019

फतेहगंज पूर्वी क्षेत्र में बिलपुर-टिसुआ के बीच बुधवार को जनता एक्सप्रेस (14265) का इंजन फेल हो गया। यही नही, ट्रेन का जीपीएस भी काम नहीं कर रहा था। इससे लोकेशन ना मिलने से मुरादाबाद मंडल तक अफरा-तफरी मच गई। बाद में लोको पायलट ने किसी तरह इंजन को ठीक किया।

जानकारी के अनुसार वाराणसी से देहरादून को जाने वाली जनता एक्सप्रेस (14265) रात करीब नौ बजे बिलपुर स्टेशन से रवाना हुई। टिसुआ स्टेशन आने से पहले बीच रास्ते ट्रेन का इंजन खराब हो गया। मुरादाबाद कंट्रोल पर ट्रेन की लोकेशन नहीं दिखी तो सूचना बरेली जंक्शन भेजी गई। यहां से आरपीएफ, जीआरपी व रेलवे स्टाफ रूट पर भेजा गया।








मौके पर टीम पहुंची तो मालूम हुआ कि इंजन में खराबी आ गई थी और लोको पायलट इसे दुरुस्त करने में जुटे थे। जीपीएस भी किसी वजह से काम नहीं कर रहा था। जिससे लोकेशन नहीं मिल रही थी। सूचना मुरादाबाद मंडल में दी तो अधिकारियों ने राहत की सांस ली। करीब दस बजे इंजन ठीक होने के बाद जनता एक्सप्रेस रवाना हुई।

फर्जी विजिलेंस इंस्पेक्टर ने टीटीई से खूब कराई खातिरदारी, RPF ने दबोचा lucknow news

दवा बेचने वाला एक मेडिकल रिप्रजेंटेटिव फर्जी विजिलेंस इंस्पेक्टर बनकर अवध एक्सप्रेस की एसी सेकेंड बोगी में सवार हो गया। टीटीई को जैसे ही उसने अपना परिचय विजिलेंस इंस्पेक्टर के रूप में दिया, टीटीई ने तुरंत सीट दे दी। खुद कोच अटेंडेंट को बुलाकर सीट पर चादर बिछवाई। चाय पिलाई और नाश्ता भी कराया। लेकिन, कुछ ही देर में टीटीई को असलियत का पता चल गया। टीटीई ने कंट्रोल रूम को सूचना दी और फिर फर्जी विजिलेंस इंस्पेक्टर को धर दबोचा गया।




इंदिरानगर निवासी प्रत्यक्ष जायसवाल एक दवा कंपनी का मेडिकल रिप्रजेंटेटिव है। वह ट्रेन नंबर 19037 अवध एक्सप्रेस से बादशाहनगर से एसी सेकेंड बोगी ए-1 में सवार हुआ। कोच के टीटीई संदीप श्रीवास्तव से उसने कहा कि वह विजिलेंस इंस्पेक्टर है। गोंडा तक जाना है। टीटीई ने सीट नंबर 19 प्रत्यक्ष जायसवाल को दे दी। अटेंडेंट को बुलाकर साफ चादर, तकिया और कंबल बिछवा दिए। पैंट्री कार से चाय पिलवा दी और फिर नाश्ता भी कराया। अपनी ड्यूटी करते हुए संदीप श्रीवास्तव जब प्रत्यक्ष जायसवाल के पास पहुंचा तो उससे तैनाती के बारे में बातचीत करने लगा।




जहां पद नहीं, वहां है तैनाती
बातचीत में प्रत्यक्ष जायसवाल ने बताया कि वह उत्तर रेलवे लखनऊ  के मंडल के लेखा विभाग में तैनात है। गोंडा में कोई मशीन लग रही है इसलिए वहां जा रहा है। इसी बात से संदीप को शक हो गया। दरअसल, विजिलेंस इंस्पेक्टर की तैनाती जोनल और रेलवे बोर्ड मुख्यालय में होती है। मंडल में यह पद ही नहीं है, जबकि गोंडा पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में आता है और वह खुद की तैनाती उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में बता रहा था।  ऐसे में टीटीई ने कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी।

सहायक वाणिज्य प्रबंधक एसके शंखवार ने मौके पर आरपीएफ को भेजा। आरपीएफ ने उससे पहचान पत्र मांगा, जिसे वह नहीं दिखा सका। पूछताछ में उसने बताया कि दोस्त ने कहा था कि विजिलेंस इंस्पेक्टर बताओगे तो कोई टिकट नहीं मांगेगा। विजिलेंस इंस्पेक्टर बनकर कई महीनों से वह यात्रा कर रहा था।

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