बुलेट ट्रेन का फायदा – क्या रेलवे को इससे कोई फायदा होगा

| July 29, 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट बुलेट ट्रेन न सिर्फ मुंबई-अहमदाबाद, बल्कि पूरे पश्चिम भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित करने में कामयाब होगी। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने इस परियोजना के 2023 तक पूरी हो जाने की उम्मीद जताई है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1,08,000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। मुंबई को दुनिया के सबसे महंगे शहरों में एक माना जाता है। पिछले सप्ताह ही जापानी कंपनी सुमितोमो ने मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स में तीन एकड़ का प्लॉट 2,238 करोड़ रुपये में खरीदा है। देश-दुनिया की बहुत सारी कंपनियां इतनी महंगी कीमत चुका पाने में असमर्थ होने के कारण मुंबई में अपना कार्यालय नहीं खोल पातीं।








मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के आयुक्त आरए राजीव का मानना है कि बुलेट ट्रेन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की यह मुश्किल आसान कर देगी और देश की आर्थिक राजधानी मुंबई दुनिया भर के व्यावसायिक आकर्षण का केंद्र बन जाएगी। जहां बुलेट ट्रेन के भूमिगत स्टेशन का पिछले साल अगस्त से निर्माण हो रहा है, उसी भूखंड के ऊपर एमएमआरडीए के पास 165 एकड़ का व्यावसायिक स्थान उपलब्ध है। साथ ही उसी क्षेत्र में 36 एकड़ का आवासीय स्थान भी उपलब्ध है।




राजीव मानते हैं कि किसी कंपनी को यदि अपने व्यवसाय के लिए कुल एक लाख वर्ग मीटर जगह की जरूरत हो, तो उसे अपना फ्रंट ऑफिस चलाने के लिए सिर्फ 20,000 वर्ग मीटर जगह की ही जरूरत होती है। शेष 80,000 वर्ग मीटर का उपयोग वह कहीं भी कर सकती है। बुलेट ट्रेन शुरू होने के बाद कोई भी विदेशी कंपनी अपना फ्रंट ऑफिस मुंबई में खोलकर अपना बैक ऑफिस मुंबई से अहमदाबाद के बीच पड़ने वाले बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशनों के नजदीक कहीं भी खोल सकती है। इनमें से चार स्टेशन मुंबई, ठाणो, विरार और बोइसर महाराष्ट्र में पड़ेंगे तथा आठ स्टेशन वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वड़ोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती गुजरात में। चूंकि बुलेट ट्रेन की गति 320 किमी प्रति घंटा होगी, इसलिए मुंबई से अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर की दूरी तय करने में इसे दो घंटे से भी कम समय लगेगा। इतना समय अभी विरार, कर्जत, बदलापुर आदि स्टेशनों से लोकल ट्रेन से दक्षिण मुंबई पहुंचने में लगता है।




एमएमआरडीए अध्यक्ष के अनुसार, निकट भविष्य में न सिर्फ मुंबई और अहमदाबाद, बल्कि बुलेट ट्रेन के मार्ग में पड़ने वाले सभी स्टेशनों के आसपास के क्षेत्र गुलजार हो जाएंगे। इन स्टेशनों से बुलेट ट्रेन के जरिये मुंबई पहुंचना आसान हो जाएगा। मुंबई और गुजरात से गहरा संबंध रखने वाले वाले हीरा व्यवसायियों के लिए भी बुलेट ट्रेन वरदान साबित होगी। हीरा व्यापार का एशिया का सबसे बड़ा केंद्र भारत डायमंड बोर्स बांद्रा-कुर्ला कांप्लेक्स में निर्माणाधीन बुलेट ट्रेन स्टेशन के ठीक सामने स्थित है। हीरा तराशने का काम सूरत, अहमदाबाद और सौराष्ट्र में होता है। बुलेट ट्रेन शुरू हो जाने के बाद हीरा व्यवसायियों को भी माल लाने-ले जाने के लिए एक सुरक्षित माध्यम मिल जाएगा। इसका सकारात्मक असर उनके व्यवसाय पर पड़ेगा।

रेल मंत्री ने जताई है परियोजना के 2023 तक पूरा होने की उम्मीद, कुल अनुमानित लागत 1,08,000 करोड़ रुपये आंकी जा रही है

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