दो संहिताओं में सिमटेंगे सभी श्रम कानून, विधेयक हुआ पेश

| July 24, 2019

श्रम सुधारों की दिशा में आगे बढ़ते हुए सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में प्रस्तावित श्रम संहिताओं से संबंधित दो विधेयक पेश किए। इनमें एक का संबंध कार्यस्थल पर कर्मचारियों की सुरक्षा, कार्यदशा एवं स्वास्थ्य से है, जबकि दूसरे का संबंध समय पर व न्यूनतम निर्धारित मजदूरी सुनिश्चित करने से है। इनके जरिये 17 मौजूदा श्रम कानूनों को दो श्रम संहिताओं में समेटा जा रहा है।








केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार ने लोकसभा में कर्मचारियों की कार्यगत सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशाओं पर संहिता (कोड ऑन ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस – ओएसएच) विधेयक 2019 तथा वेतन संहिता विधेयक 2019 पेश किया।




ओएसएच कोड में मौजूदा 13 श्रम कानूनों को सरलीकरण, संशोधन एवं विलय के जरिये एक कानून में तब्दील किया गया है। यह खदानों एवं गोदी-बंदरगाहों को छोड़ दस या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगा। इसमें सिनेमा एवं थियेटर कर्मचारियों को भी डिजिटल ऑडियो-विजुअल कर्मचारी मानते हुए शामिल किया गया है। ई-पेपर, रेडियो समेत इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के सभी रूप इसमें आ गए हैं। इससे इस क्षेत्र में कार्यरत पत्रकारों व कर्मचारियों कीदशा में सुधार होगा। कानून बनने के बाद एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर काम करने वाले श्रमिकों को भी सुरक्षा प्राप्त होगी। बेसहारा बुजुर्गो की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए ओएसएच कोड विधेयक में परिवार की परिभाषा के तहत आश्रित दादा-दादी को भी परिवार का हिस्सा बनाया गया है।




बिल में 10 से अधिक कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों के लिए एकल पंजीकरण की अवधारणा प्रस्तुत करने के साथ ‘राष्ट्रीय कार्यगत सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड’ की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है। इसमें ट्रेड यूनियनों, नियोक्ता संगठनों तथा राज्य सरकारों के प्रतिनिधि होंगे। इसका काम कर्मचारियों की कार्यगत सुरक्षा एवं स्वास्थ्य के बारे में केंद्र तथा राज्यों को सुझाव देना होगा। इसी के साथ पांच मौजूदा कानूनों के तहत गठित अनेक समितियां समाप्त हो जाएंगी।

अनिवार्य स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था: ओएसएच कोड में नियोक्ता के लिए हर कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र देना तथा साल में एक बार उनकेस्वास्थ्य की मुफ्त जांच कराना अनिवार्य कर दिया गया है। बिल के प्रावधानों का उल्लंघन होने से यदि किसी कर्मचारी को चोट लगती है या मृत्यु होती है तो नियोक्ता पर जुर्माना लगेगा। इसका कुछ हिस्सा (50 फीसद तक) कोर्ट के आदेश पर पीड़ित कर्मचारी या उसके कानूनी उत्तराधिकारियों को प्रदान किया जाएगा।

संतोष गंगवार ’

वेतन संहिता से आएगा बदलाव

वेतन संहिता के जरिये न्यूनतम वेतन कानून के प्रावधानों को पूरे भारत में लागू करने तथा कर्मचारियों को समय पर वेतन देने की व्यवस्था की गई है। इसके प्रावधान सभी क्षेत्रों पर लागू होंगे। अभी न्यूनतम वेतन कानून तथा वेतन भुगतान अधिनियम एक सीमा से कम वेतन पाने वाले अधिसूचित रोजगार क्षेत्रों के कर्मचारियों पर ही लागू होने से केवल 40 फीसद कर्मचारी ही इनसे लाभान्वित होते हैं। अब सभी को इनका लाभ मिलेगा। न्यूनतम वेतन के लिए विधायी आधारभूत वेतन की गणना न्यूनतम जीवनदशाओं के आधार पर तय की जाएगी। बिल में वेतन की 12 परिभाषाएं देकर इसे सरल बनाया गया है।

क्रेच, कैंटीन पर सबके लिए एक मानदंड

प्रस्तावित कोड में क्रेच, कैंटीन, प्राथमिक चिकित्सा, कल्याण अधिकारी की व्यवस्थाओं के बारे में सभी प्रतिष्ठानों के लिए समान प्रावधान हैं। महिला कर्मियों को उनकी सहमति पर सुरक्षा, छुट्टी व काम के घंटों की शर्तो के साथ शाम सात बजे से सुबह छह बजे तक काम करने की अनुमति है।

विपक्ष ने किया विरोध

कांग्रेस के अधीर रंजन चौधरी ने विरोध करते हुए कहा कि यह बड़ा मसला है। बिल को स्थायी समिति को भेजाना चाहिए। तृणमूल के सौगत राय व आरएसपी के एनके प्रेमचंद्रन ने यही मांग की। गंगवार ने कहा कि बिल 13 कर्मचारी संगठनों से चर्चा के बाद बने हैं।

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