Railway to lock out its printing presses next year

| July 23, 2019

भारतीय रेलवे के प्रिंटिंग प्रेस अगले वर्ष इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएंगे। रेलवे बोर्ड ने 31 मार्च 2020 तक सभी प्रिंटिंग प्रेस को बंद करने का फरमान जारी कर दिया है। साथ ही समस्त जोनल रेलवे को निर्देशित किया है कि किसी विषम परिस्थिति से निपटने के लिए वर्तमान में चल रहे प्रिंटिंग प्रेस से कम से कम 12 माह का प्रिंटेड कार्ड टिकट (पीसीटी) छपवा कर रख लें।








रेलवे बोर्ड के पैसेंजर मार्केटिंग और स्टोर्स डायरेक्टर ने सभी जोनल रेलवे को पत्र भेजा है। दरअसल, प्रिंटिंग प्रेस बंद होने की प्रक्रिया के साथ टिकटों की छपाई पर भी विराम लग गया। रेलवे बोर्ड ने जून में हाल्ट स्टेशनों पर भी पीसीटी की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दिया। लेकिन विषम परिस्थिति के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने को लेकर समस्या पैदा होने की आशंका बनी हुई थी।




डिस्कनेक्ट होने पर भी 72 घंटे टिकटों की बुकिंग करेगा यूटीएस बोर्ड के अनुसार सेंटर फार रेलवे इंफार्मेशन सिस्टम (क्रिस) से डिस्कनेक्ट होने पर भी यूटीएस अनरिज‌र्व्ड 72 घंटे तक टिकटों की बुकिंग कर सकता है। क्रिस से कनेक्ट होने पर वह 72 घंटे का बैकअप सुरक्षित रख लेगा। ऐसे में तकनीकी खामी पर भी टिकटों की बिक्री प्रभावित नहीं होगी। पिछले वर्ष ही बंद हो गया गोरखपुर का प्रिंटिंग प्रेस भारतीय रेलवे में कुल 14 प्रिंटिंग प्रेस थे।




वर्ष 2009 में प्रेस बंद करने का खाका तैयार हुआ। वर्ष 2010-11 से कवायद शुरू हो गई और धीरे-धीरे प्रेस बंद होने लगे। वर्ष 2016 से बंदीकरण ने तेजी पकड़ ली। जुलाई 2018 में गोरखपुर स्थिति प्रिंटिंग प्रेस बंद हो गया। मध्य रेलवे मुंबई, पूर्व रेलवे हावड़ा, उत्तर रेलवे दिल्ली, दक्षिण रेलवे चेन्नई और दक्षिण मध्य रेलवे सिकंदराबाद के प्रेस बचे हैं।

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