वन्दे भारत से भारतीय रेलवे आउट – वंदे भारत प्रोजेक्ट में बढ़ेगी विदेशी कंपनियों की भागीदारी?

| July 23, 2019

वंदे भारत एक्सप्रेस सीरीज की 40 नई ट्रेनों का टेंडर रद होने के बाद अब इन ट्रेनों को बनाने में विदेशी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने की संभावना है। इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। नया टेंडर दो सप्ताह के अंदर जारी हो सकता है।

ट्रेन बाहर से बनवाई जाएगी या भारत में बनेगी, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इसे मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट से हटाया नहीं जाएगा बल्कि इन कंपनियों को हिंदुस्तान में ही निर्माण इकाई लगाने की सुविधा मिलेगी। जर्मनी, स्पेन, फ्रांस, जापान, चीन की विदेशी कंपनियां टेंडर में भाग ले सकती हैं। चीनी कंपनियों को तवज्जो दी जा सकती है। टेंडर के बाद जो कंपनियां शॉर्टलिस्ट की जाएंगी, उन्हें बड़े पैमाने पर काम दिए जाने पर विचार विमर्श चल रहा है। वंदे भारत एक्सप्रेस को लेकर ही 2 जुलाई को रेल मंत्री पीयूष गोयल और भारत और विदेशी 19 कंपनियों के बीच में बैठक हुई थी। हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि भारतीय कंपनियों को इस प्रोजेक्ट से बाहर किस तरह किया जाएगा? नया टेंडर जारी होने पर सारी स्थितियां साफ होंगी।








टेंडर रद करने के कारण स्पष्ट नहीं

रेल राज्य मंत्री सुरेश सी अंगड़ी ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि वंदे भारत एक्सप्रेस के टेंडर रद करने के कारण स्पष्ट नहीं हैं। इस बारे में चेयरमैन से ही पूछकर बताया जा सकता है। वंदे भारत एक्सप्रेस को विदेश से आयात किए जाने की चर्चाएं हैं, इस सवाल पर रेल राज्य मंत्री ने कहा कि मेक इन इंडिया के तहत ही इसका निर्माण किया जाएगा। उधर, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने कहा कि जल्द ही टेंडर डाल दिए जाएंगे। विदेश से आयात की जाएगी या भारत में बनेगी, इस पर उन्होंने स्थिति स्पष्ट नहीं की।




प्रोजेक्ट के तहत 40 नई ट्रेनों के निर्माण का टेंडर रद होने के बाद आयात को लेकर चर्चा तेज, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन बोले, टेंडर फिर से डाले जाएंगे

यह है मामला

वंदे भारत एक्सप्रेस के 40 नई ट्रेन बनाने के लिए 8 कंपनियों ने भागीदारी की थी, जिसमें से रेलवे ने मेधा सवरे ड्राइव्स लिमिटेड को दो और स्पेन की एक कंपनी को एक रैक (ट्रेन) बनाने की हामी भरी थी। रेलवे के इस फैसले पर मेधा ने सवाल उठाते हुए वंदे भारत रैक के निर्माण से हाथ खींच लिए थे।




दो रैक बनाने का आर्डर मिलने पर मेधा ने आपत्ति जताई और कहा कि रेट कम करने के बावजूद 80 फीसद की जगह महज उनको महज दो रैक ही बनाने की हरी झंडी दी गई। कंपनी ने कहा कि वे मात्र दो रैक के लिए कम की गई कीमत पर काम करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में अर्नेस्ट मनी डिपाजिट (ईएमडी), जो 20 लाख रुपये है, उसे रिलीज किया जाए। यह रैक इंटीग्रल कोच फैक्ट्री चेन्नई में बनाए जाने थे। इसी बीच रेलवे ने वंदे भारत और रेलवे मेन लाइन इलेक्टिक मल्टीपल यूनिट (मेमू), इलेक्टिकल मल्टीपल यूनिट (ईएमयू) और एयर कंडीशंड ईएमयू के सभी टेंडर रद कर दिए। यह टेंडर करीब 3 हजार करोड़ रुपये के बताए जाते हैं।

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