Government takes measures to save home buyers from builders

| July 15, 2019

 पनी गाढ़ी कमाई और कर्ज के जरिए मकान बुक करने वाले लाखों लोगों की परेशानी का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई को केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसा ’यूनिफॉर्म’ प्रपोजल सामने रखे, जो किसी एक नहीं, बल्कि वादे पूरे न करने वाले तमाम बिल्डरों से जुड़े मामले सुलझाने में काम आए। इसके दो दिन बाद केंद्र ने कह दिया कि ऐसी पॉलिसी बनाने पर काम चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट के सामने मामला था जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड के प्रोजेक्ट्स में फंसे करीब 23000 होम बायर्स का। अब केंद्र के सामने सवाल है कि बिल्डर की कुर्की से बैंकों के बकाया की रिकवरी और बायर को पजेशन दिलाने के बीच किस तरह संतुलन साधा जाए।








करीब एक दशक से ईएमआई और रेंट का दोहरा बोझ झेल रहे होम बायर्स का यह इकलौता मामला नहीं है। यूनिटेक लिमिटेड के मामले में भी 16000 से ज्यादा होम बायर फंसे हैं। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में भी केंद्र से प्रोजेक्ट्स पूरे कराने का प्रपोजल देने को कह चुका है। करीब 42000 होम बायर्स की परेशानी से जुड़े आम्रपाली ग्रुप के मामले में तो लगभग 3500 करोड़ रुपये की हेराफरी का आरोप लगा है, ग्रुप के सीएमडी और दूसरे अधिकारियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। होम बायर्स चाहते हैं कि इन मामलों में कुर्की कराने के बजाय उनके प्रोजेक्ट पूरे कराए जाएं क्योंकि कुर्की में बैंकों को तो उनका बकाया आधा-अधूरा मिल भी जाएगा, होम बायर्स के फ्लैट का मामला लटक जाएगा।




देशभर में करीब 575,900 यूनिट्स का काम देरी से चल रहा है। एनारॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन यूनिट्स में करीब 4.64 लाख करोड रुपये फंसे हैं। इनमें से करीब 210,000 यूनिट्स मुंबई मेट्रोपोलिटन रीजन में और 200000 यूनिट्स एनसीआर में हैं। मुंबई में 2.34 लाख करोड़ और दिल्ली में 1.26 लाख करोड़ रुपये इनमें अटके हैं। 1 मई 2017 को पूरी तरह लागू हुए रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डिवेलपमेंट) एक्ट 2016 को 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने नोटिफाई किया है, लेकिन होम बायर्स की शिकायत है कि कई राज्यों ने रेरा के नियमों को बिल्डरों के पक्ष में नरम कर दिया है। सरकार ने पिछले दिनों संसद को बताया था कि रेरा के तहत अब तक होम बायर्स की 20125 शिकायतें दूर की गई हैं। हालांकि कई पुराने प्रोजेक्ट्स इसके दायरे में नहीं हैं और वहां अदालतों का ही सहारा है।




सुप्रीम कोर्ट ने 9 जुलाई को जब यूनिफॉर्म प्रपोजल देने को कहा तो केंद्र ने कहा था कि 17 जुलाई को जेपी मामले में एनसीएलटी में सुनवाई है और वहां संभावित समाधान की प्रतीक्षा कर लेनी चाहिए। इस पर कोर्ट ने सुनवाई की तारीख 18 जुलाई तय की। आम्रपाली मामले में भी 18 जुलाई को सुनवाई होनी है। एडिशनल सॉलिसीटर जनरल माधवी दीवान ने 11 जुलाई को कोर्ट से कहा था कि केंद्र एक यूनिफॉर्म प्रपोजल पर काम कर रहा है और कोर्ट के निर्देशानुसार इसे यूनिटेक केस में 23 जुलाई तक पेश किया जाएगा। मई में आम्रपाली मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट कहा था, ‘हमें पता है कि रियल एस्टेट सेक्टर में किस तरह बिल्डरों से सांठगांठ कर अधिकारी लाभ उठा रहे हैं। बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हो रही है, लेकिन हम करप्शन के लिए मौत की सजा नहीं दे सकते हैं।’ अब देखना है कि ‘धोखाधड़ी’ का नेटवर्क तोड़ने और लाखों होम बायर्स का इंतजार खत्म करने का कौन सा प्लान सरकार सुप्रीम कोर्ट के सामने रखती है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यूनिफॉर्म प्रपोजल पेश करने को कहा है

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