रेलवे अनुकंपा आधार पर 30 दिनों में नौकरी देगा

| June 22, 2019

लवे में काम करने के दौरान किसी कर्मचारी की अकास्मिक मृत्यु होने पर अब आश्रितों को नौकरी के लिए लंबे समय तक रेलवे कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उत्तर रेलवे महाप्रबंधक कार्यालय से जारी आदेश में सभी पांच मंडलों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी आश्रितों को आवेदन के 30 दिन में नियुक्ति पत्र दे दिया जाए।.








आदेश में कहा गया है कि अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लिए लंबित आवेदनों को आगामी दो माह के भीतर सुलझा लिया जाए। इससे अपने परिजनों को खोने वाले लोगों को राहत मिलेगी। साथ ही रेलवे में रिक्त पड़े पदों में भर्ती होने से कामकाज सुधरेगा। उत्तर रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक अनुकंपा के आधार पर नौकरी के लंबित मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे सभी पांच मंडलों दिल्ली, अंबाला, फिरोजपुर, लखनऊ, मुरादाबाद में अनुकंपा के आधार पर सभी पुराने मामलों को भी निपटाया जाएगा। इस आदेश के बाद उम्मीद है कि अगस्त 2019 तक करीब 1261 लोगों को नौकरी दे दी जाएगी। इन लोगों को 15 हजार आवेदनों में से चुना गया है।




रेलवे बोर्ड ने दिया सख्त निर्देश, यात्रियों की तकलीफें जानने को ट्रेनों में सफर करें अफसर

गर्मी में ट्रेन यात्रियों की मुश्किलें कम करने के लिए अब अधिकारियों को सचमुच में ट्रेन में सफर करना होगा। रेलवे बोर्ड अध्यक्ष विनोद यादव ने इस संबंध में सभी महाप्रबंधकों को नए निर्देश जारी किए हैं।

सभी जोनों के महाप्रबंधकों को भेजे पत्र में रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने लिखा है कि वरिष्ठ अधिकारियों के ट्रेन में सफर करने और यात्रियों की परेशानियों से रूबरू होने के बारे में पहले भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन उन पर गंभीरता नहीं बरती जा रही है। इसलिए सभी जीएम, डीआरएम तथा यूनिट हेड व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित करें कि उनके मातहत कार्य कर रहे अधिकारी बार-बार ट्रेनों में यात्रा करें और यात्रियों की मुश्किलों का मौके पर समाधान करें।




अपने आधिकारिक दौरों में उन्हें कोच की स्थिति का मुआयना करना चाहिए और यात्रियों की शिकायतें सुननी चाहिए। यही नहीं, प्रत्येक दौरे के बाद इसकी रिपोर्ट भी तैयार कर भेजनी चाहिए। सभी महाप्रबंधकोंको सुनिश्चित करना होगा कि निर्देशों का अनुपालन हो और मुआयने तथा यात्रियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

यादव ने लिखा है कि ट्रेनो में यात्रियों के बीच स्वयं यात्रा करके ही अधिकारी रेल सेवाओं की वास्तविक स्थिति समझ सकते हैं। सिर्फ इसी से सेवाओं की हकीकत पता चल सकती है और सुधार के नए उपायों पर काम किया जा सकता है।

गौरतलब है कि ट्रेनों के भीतर यात्री सेवाओं की स्थिति का पता लगाने और उनमें सुधार करने के लिए रेलवे बोर्ड ने दो वर्ष पहले अधिकारियों को स्लीपर समेत हर श्रेणी में यात्रा करने तथा यात्रियों से फीडबैक लेने के निर्देश जारी किए थे।

कुछ समय तक को इनका सही ढंग से पालन हुआ, लेकिन बाद में खानापूरी होने लगी। इससे सेवाओं में गिरावट की शिकायतें मिलने लगी हैं। पिछले दिनों केरल एक्सप्रेस में कुछ यात्रियों की भीड़ और गर्मी के कारण मौत को रेलवे बोर्ड चेयरमैन ने अधिकारियों की लापरवाही माना है और इसी क्रम में पुराने निर्देशों के कड़ाई से अमल की ताकीद की है।

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