Modi Government to take action against corrupt government officials

| June 22, 2019

मोदी सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ मिशन क्लीन अभियान को और विस्तार रूप देना शुरू कर दिया है। इसके दायरे में सरकारी बैंक और सरकारी कंपनियां भी आ गई हैं। सरकार ने पब्लिक सेक्टर की कंपनियों (पीएसयू) और बैंकों के दागी और भ्रष्ट अधिकारियों के साथ-साथ भ्रष्ट कर्मचारियों की लिस्ट बनानी शुरू कर दी है। अब इन भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकाारियों के खिलाफ फंडामेंटल रूल 56 (जे) के तहत कार्रवाई की जाएगी। यानी इनको जबरन रिटायर किया जाएगा।








सरकार अब तक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के 12 और सेंट्रल एक्साइज के 15 भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है। इनको जबरन रिटायरमेंट दिया चुका है। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय के भ्रष्टाचार अधिकारी उसके निशाने पर हैं। अब सरकार ने सरकारी बैंकों के साथ सरकारी कंपनियों के भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना लिया है।



अब काम की भी होगी समीक्षा

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने सभी मंत्रालयों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीन वाली सरकारी कंपनियों यानी पीएसयू के स्टाफ की समीक्षा करें। यह पता लगाएं कि किन-किन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार के मामले चल रहे हैं। कितने मामलों में फैसले आ चुके हैं। कितने अधिकारियों के खिलाफ अब तक कार्रवाई की जा चुकी है। कितने सस्पेंड चल रहे हैं। इन सबकी लिस्ट तैयार की जाए। यही निर्देश सरकारी बैंकों को भी दिया गया है। सरकारी बैंकों से कहा गया है कि अब तक जो धोखे या फ्रॉड के मामले सामने आए हैं, उनमें कितने कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उसकी लिस्ट भेजी जाए। मंत्रालय और सरकारी बैंकों से यह कहना सबसे अहम है कि वे अधिकारियों और कर्मचारियों की उपयोगिता को लेकर रिपोर्ट तैयार करें। यह आकलन करें कि अधिकारी-कर्मचारी किस तरह से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी अपनी ड्यूटी सही तरीके से नहीं कर रहा है, काम में लापरवाही बरत रहा है तो उसकी लिस्ट भी सरकार को दी जाए। उस कर्मचारी या अधिकारी की उपयोगिता को देखते हुए उसके बारे में फैसला लिया जाएगा।




बैंकों को फ्रॉड को रोकना

एक सीनियर अधिकारी का कहना है कि सरकार चाहती है कि बैंकों में फ्रॉड रुके। पिछले दिनों आरबीआई ने बैंकों में बढ़ते फ्रॉड को लेकर जो आंकड़े पेश किए, उससे सरकार की परेशानी बढ़ गई है। एक आरटीआई के जवाब में आरबीआई ने रिपोर्ट दी है कि पिछले 11 वर्षों में बैंकों में धोखाधड़ी के 50,000 से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें कुल 2.05 लाख करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 11 सालों (2008-2009 से 2018-19 के बीच) में 2.05 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के कुल 53,334 मामले दर्ज किए गए हैं।

अधिकारी के अनुसार, सरकार ने भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कदम उठाकर यह मैसेज देने की कोशिश में है कि अब इस तरह की चीजों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इससे बैंकों में फ्रॉड के कम मामले सामने आएंगे।

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