Cadre Restructuring will abolish group d posts, privatization to increase

| June 17, 2019

कैडर निर्धारण से खत्म हो जाएंगे चतुर्थ श्रेणी पद, आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी प्रथा को मिलेगा बढ़ावा

आईआईएम की कैडर निर्धारण रिपोर्ट से चतुर्थ श्रेणी पदों के अस्तित्व पर ही खतरा पैदा हो गया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आईआईएम रिपोर्ट किस आधार पर तय की गई अभी तक यह ही तय नहीं हो पाया है। संगठनों का आरोप है कि जिस तरह से रिपोर्ट बनाई गई है उसके आधार पर तो चतुर्थ श्रेणी पद जैसे दफ्तरी, सेवक, साइक्लो, स्वीपर, हॉस्टल कुक, हेड माली, संग्रह सेवक, बण्डल लिफ्टर, बिजली मिस्त्री, फोटो तन्त्र चालक, कुर्सी बुनकर और प्राविधिक निरीक्षक पद समाप्त हो जाएंगे।








कैडर निर्धारण करने में पैसे का हुआ दुरुपयोग

आईआईएम कैडर निर्धारण रिपोर्ट पर विभाग ने लगभग 96 लाख रुपये खर्च किए हैं इसके बावजूद इस रिपोर्ट के आने के बाद विभाग में खलबली मची है। उप्र चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ वाणिज्य कर विभाग के प्रदेश महामंत्री सुरेश सिंह यादव कहते हैं कि विभाग ने रिपोर्ट बनवाने के लिए इतनी बड़ी रकम क्यों खर्च की। जबकि शासन के पास कार्मिक विभाग मौजूद है और उसके पास कैडर निर्धारण विशेषज्ञ भी हैं।




जिस तरह से विभाग के चतुर्थ श्रेणी पदों को दरकिनार किया गया है यह विभाग के बड़े अधिकारियों की साजिश भर है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह से अधिकारियों के पदों को अधिकार दिए गए हैं उससे यह तय है कि इस पर काफी रकम खर्च की गई है। हमारी मांग है कि विभाग को इस मामले पर जांच करके पर्दाफाश करना चाहिए।

आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी प्रथा को मिलेगा बढ़ावा

मिनिस्टीरियल संवर्ग वाणिज्य कर के प्रांतीय महामंत्री जेपी मौर्य ने बताया कि आईआईएम की कैडर निर्धारण रिपोर्ट का खुलासा न हो पाए इसके लिए विभागीय अधिकारियों ने काफी जतन किए। कई बार अधिकारियों से इस रिपोर्ट को देने के लिए विभाग के कई कर्मचारी सगठनों ने मांग की लेकिन उन्हें यह रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई। जब बात नहीं बनी तो लगभग आठ कर्मचारी संगठनों ने मिलकर उत्तर प्रदेश वाणिज्य कर कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति का गठन करके आन्दोलन की चेतावनी दी। इसके बाद विभाग ने रिपोर्ट उपलब्ध कराई जिससे इन मामलों का खुलासा हुआ।




जेपी मौर्य का आरोप है कि रिपोर्ट की समीक्षा के लिए जिस कमेटी का गठन किया गया है उसमें चतुर्थ श्रेणी और मिनिस्टीरियल ग्रुप के सदस्य को नहीं रखा गया है। इसकी शिकायत प्रमुख सचिव तक की गई है। वहीं सुरेश सिंह यादव का कहना है कि आईआईएम रिपोर्ट के लागू होने से विभाग में आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा मिलेगा। जबकि विभाग इसके दंश पहले भी झेल चुका है वर्ष 2017 में लखनऊ जोन के खण्ड-8 में लगभग 20 करोड़ का घोटाला हुआ था जिसमें सभी साजिशकर्ता आउटसोर्सिंग के लोग थे जिनको जेल भी भेजा गया था।

Category: News

About the Author ()

Comments are closed.