मजदूर संघठनों के साथ सरकार की मीटिंग – न्यूनतम मजदूरी 20000 रूपए करने की मांग

| June 16, 2019

 विभिन्न कारोबारी संगठनों ने सरकार से कामगारों के लिए न्यूनतम 20,000 रुपये मासिक मजदूरी, न्यूनतम 6,000 मासिक पेंशन और साल में कम से कम 200 दिनों के अनिवार्य रोजगार की मांग की है। बजट-पूर्व सलाह के क्रम में शनिवार को कारोबारी संगठनों ने वित्त राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आगामी बजट में आयकर छूट की सीमा भी बढ़ाने की मांग रखी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पांच जुलाई को चालू वित्त वर्ष के लिए बजट पेश करेंगी। शनिवार को सीतारमण नीति आयोग की बैठक में हिस्सा ले रही थीं, जिसके चलते संगठनों ने ठाकुर से मुलाकात की।








टैक्स छूट के तहत कारोबारी संगठनों ने वेतन और पेंशनभोगी वर्ग के लिए सालाना 10 लाख रुपये तक की आय को टैक्स से मुक्त रखने की मांग की है। वहीं, वरिष्ठ नागरिकों के लिए उन्होंने सालाना आठ लाख रुपये तक की आय के अलावा आवास, चिकित्सा और शिक्षा जैसे मदों पर किए गए खर्च को आयकर से मुक्त रखने का आग्रह किया है। बैठक में करीब दर्जनभर केंद्रीय कारोबारी संगठनों के शीर्ष प्रतिनिधियों ने शिरकत की।




उन्होंने लाभ कमाने वाले केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों की निजीकरण और विनिवेश कोशिशों पर भी बैठक के दौरान चिंता जताई। इसके साथ ही उन्होंने रोजगार सृजन के लिए निवेश बढ़ाने का भी आग्रह किया। ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि वित्त मंत्री ने हमें बजट-पूर्व चर्चा के लिए आमंत्रित किया था। मंत्रलय ने हमसे चार महत्वपूर्ण पहलुओं श्रम सुरक्षा, कौशल विकास, रोजगार और मजदूरी पर राय जाननी चाही।




वहीं, इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक) के प्रेसिडेंट जी संजीव रेड्डी ने कहा कि संगठन ने लाभ कमाने वाली सरकारी कंपनियों के निजीकरण और विनिवेश का विरोध किया है। इसकी फिलहाल कोई जरूरत नहीं है। इसके साथ ही संगठन ने 44 श्रम कानूनों को चार कोड के तहत समाहित करने के सरकार के फैसले का भी विरोध किया है।

एक बयान में वित्त मंत्रलय ने कहा कि कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने कौशल विकास और ग्रामीण युवाओं की आकांक्षाओं में तारतम्यता की सलाह दी। इसके साथ ही उन्होंने न्यूनतम मजदूरी कानून को कड़ाई से लागू करने की भी मांग की।

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