Railway authorities take tough stance on encroachments in colonies

| June 10, 2019

रेलवे की कालोनियों में फैले अतिक्रमण पर डीआरएम ने नाराजगी जताई है। रेल कर्मियों ने खुद के मकान को किराये पर दे दिया है। जहां अवैध तरीके से किराये पर मकान लेकर बाहरी लोगों ने अतिक्रमण किया है। लोगों ने वहां अवैध कब्जा करके दुकाने खोल ली है। जिम खुल गया है। मवेशियों के लिए तबले खुले हैं। .

उत्तर रेलवे की 35 कालोनियों में फैला है अतिक्रमण

रेल कर्मी आवास पाने के लिए जहां डीआरएम कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं वहीं जिन रेलकर्मियों को आवास मिला है उन्होंने अपने आवास को किराये पर दे दिया है। इस मामले में बीते दिनों हुई छापेमारी के बाद खुलासा हो चुका है। आरपीएफ सीआईबी इंस्पेक्टर टीपी सिंह की टीम ने रेलवे कालोनियों में अवैध अतिक्रमण पर छापेमारी की थी।.








ऐसे अवैध अतिक्रमण के खिलाफ अभियान लगातार चलाए जा रहे हैं। इस मामले में उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल प्रशासन ने बताया कि उत्तर रेलवे में करीब 35 कालोनियां है। जहां हजारों की संख्या में रेलभ्कर्मी व उनका परिवार रहता है। अधिकांश कालोनियों में अतिक्रमण है। ऐसे कालोनियों पर कार्रवाई करने रेलवे ने खाका तैयार कर लिया है। इस बाबत उत्तर रेलवे मेंस यूनियन के मंडल मंत्री आरके पांडेय की ओर से डीआरएम की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की थी।




रेलवे कॉलोनी में अनैतिक कार्य की जांच शुरू

रेलवे कॉलोनी में अपराधियों का जमावड़ा लगने और देह व्यापार कराने के प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। आरपीएफ की रिपोर्ट पर रेलवे खुफिया विभाग के अधिकारी शनिवार को इसकी जांच करने ऊंचाहार आए और आवश्यक साक्ष्य जुटाए।

नगर में ही रेलवे की जमीन पर एनटीपीसी द्वारा सौ आवास बनाए गए हैं। इसमें कुछ एक में रेल कर्मी रहते हैं। अधिकांश मकानों में राजनैतिक हस्तियों के साथ रहने वाले दबंगों ने कब्जा कर लिया है। हाल ही में इसकी रिपोर्ट आरपीएफ ने इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी। बताया कि इन्हीं दबंगों द्वारा रेलवे कालोनी से देह व्यापार का धंधा भी कराया जा रहा है। जिसे रेलवे ने गंभीरता से लेते हुए खुफिया विभाग के अधिकारी डीएम त्रिपाठी के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एक टीम ऊंचाहार भेजी। टीम ने आरपीएफ कोतवाली में रिपोर्ट में दर्शाए गए संगीन मामलों का आधार जानने की कोशिश की है। आरपीएफ प्रभारी से ये भी पूछा कि यदि कोई अनैतिक कार्य की पुख्ता सूचना थी तो उच्च अधिकारियों के पास रिपोर्ट भेजने से पहले स्थानीय स्तर पर पुलिस के सहयोग से कार्रवाई क्यो नहीं की गई।




हैंडओवर नहीं हुए आवास

इस मामले मे सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि रेलवे कॉलोनी के जिन एक सौ आवासों में अनैतिक कार्य होने की बात कही जा रही है। वह कॉलोनी रेलवे की भूमि पर अवश्य बनी हुई है, लेकिन कॉलोनी का रेलवे को हस्तांतरण नहीं हुआ है।

कोट

हमें जो जानकारी मिली थी, उसकी रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी गई है। अब इसमें कार्रवाई संबंधित विभाग द्वारा की जानी चाहिए।

-एएन पाठक, प्रभारी आरपीएफ कोट

कॉलोनी सिविल में आती है, इसलिए उस पर कार्रवाई ऊंचाहार थाना ही कर सकता है। यह कानूनी अड़चन न होती तो अब तक कार्रवाई हो जाती। इसके लिए चौकी इंचार्ज को निर्देशित किया गया है।

-रवींद्र कुमार पांडेय, थानाध्यक्ष जीआरपी रायबरेली कोट

रेलवे की संपत्ति है। वे हमें लिखित में शिकायती पत्र देंगे तो हम कार्रवाई कर सकते हैं। अभी तक ऐसी कोई सूचना हमें नहीं मिली है।

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