इन 6 उपायों से फटाफट मंजूर होगा आपका होम लोन

| June 9, 2019

कई लोगों को होम लोन मिलने में दिक्कत आती है. बैंक लोन मंजूर न करने के पीछे कई कारण गिना देते हैं. फटाफट होम लोन मंजूर हो, इसके लिए अपनी पात्रता बढ़ानी होगी. इसके कुछ बहुत आसान तरीके हैं. आइए, यहां इनके बारे में देखते हैं.

1. अपने मौजूदा लोन खत्म करें अगर आप पुराने लोन को अदा कर रहे हैं तो नया लोन मिलने के आसार घटते हैं. बैंक डेट-टू-इनकम रेशियो के आधार पर आपको लोन मंजूर करते हैं. यह रेशियो कुल मासिक इनकम के अनुपात में कर्ज के भुगतान में निकलने वाली रकम के हिस्से को दिखाता है. इस तरह के भुगतान में पर्सनल लोन, कार लोन इत्यादि की ईएमआई शामिल है.








स्क्वायर कैपिटल में प्रिंसिपल पार्टनर अमित प्रकाश कहते हैं, “होम लोन के आवेदन से पहले सभी मौजूदा लोन खत्म करने चाहिए. केवल तभी डेट-टू-इनकम रेशियो को सुधारा जा सकता है. बेवजह के कर्ज का भुगतान कर आप अपने सिबिल स्कोर को भी सुधार सकते हैं. समय पर कर्जों का भुगतान करने से भी इसमें सुधार होता है.”

इस तरह होम लोन लेने के इच्छुक ग्राहकों को अपने सभी पुराने और वर्तमान में चल रहे कर्जों को खत्म करने के बारे में सोचना चाहिए. लोन खत्म करने पर बैंक से ‘नो ड्यूज’ सर्टिफिकेट लेना नहीं भूलें.




2. अपने सिबिल स्कोर को सुधारें

सिबिल स्कोर को सुधारने का बेहद आसान तरीका है. इसके लिए बस आपको अपने लोन और क्रेडिट कार्ड का भुगतान नियमित रूप से करते रहना होगा. बैंक बाजार डॉट कॉम के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, क्रेडिट स्कोर को सुधारने के ये तरीके हैं:

-अपनी ईएमआई और क्रेडिट कार्ड का पूरा भुगतान समय से करें.
-सीयूआर (क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो) को निचले स्तर पर रखें. यानी अपने क्रेडिट कार्ड के खर्च करने की सीमा का करीब 20-30 फीसदी ही खर्च करें.
-डिफॉल्ट और लोन सेटेलमेंट से बचें. ये आपके क्रेडिट स्कोर पर काफी बुरा असर डालते हैं.
-एक बार में ही क्रेडिट पर बहुत से प्रोडक्ट नहीं खरीदें. इससे क्रेडिट स्कोर घटता है.
-क्रेडिट रिपोर्ट को जरूर चेक करें. इसमें गड़बड़ी के कारण भी स्कोर घटता है. इस तरह बैंक के साथ कोई विवाद चल रहा है तो इसके सुलझ जाने तक होम लोन के लिए आवेदन नहीं करें.
इस तरह बैंक के साथ कोई विवाद चल रहा है तो इसके सुलझ जाने तक होम लोन के लिए आवेदन नहीं करें.




3. ज्वाइंट लोन लें

होम लोन पाने के आसार बढ़ाने के लिए इसका काफी ज्यादा इस्तेमाल होता है. इस तरह की प्रक्रिया में किसी एक जीवनसाथी को को-एप्लिकेंट बनाया जाता है. इससे पात्रता बढ़ जाती है. यही नहीं, कई तरह के अतिरिक्त बेनिफिट भी मिलते हैं. शेट्टी ने कहा कि होम लोन के लिए सबसे आदर्श को-एप्लिकेंट आपका जीवनसाथी है.

4. स्टेप-अप होम लोन का विकल्प चुनें

अमूमन होम लोन लंबी अवधि के होते हैं. रिटायरमेंट के बाद इसे ले पाना कठिन होता है. इसलिए 30 से 40 साल में अधिक उम्र के लोगों की तुलना में ज्यादा लोन मिलने की संभावना रहती है. लेकिन, यहां समस्या यह है कि ज्यादातर युवा पेशेवर ईएमआई का भुगतान करने में कठिनाई का सामना करते हैं.

इसी मोर्चे पर स्टेप-अप होम लोन मददगार साबित होता है. इस तरह के लोन में शुरुआती वर्षों में ईएमआई कम होती है. बाद में यह बढ़ती है.

पुणे की फिनटेक कंपनी लोन टैप के सीईओ व सह-संस्थापक सत्यम कुमार कहते हैं कि नौकरी के शुरुआती वर्षों में अक्सर सैलरी कम होती है. अनुभव के साथ यह बढ़ती है. इस तरह स्टेप-अप लोन अच्छा विकल्प है.

5. लंबी अवधि का लोन चुनें
लंबी अवधि का विकल्प चुनना भी एक विकल्प है. हालांकि, इसमें ब्याज देनदारी भी बढ़ जाती है. शेट्टी ने कहा, “आप लोन की अवधि बढ़ा सकते हैं. इसका एक नुकसान यही है कि कर्ज की लागत काफी बढ़ जाती है.”

उदाहरण के लिए अगर आपने 20 साल के लिए 9 फीसदी की दर से 50 लाख रुपये का लोन लिया है. तो, हर महीने की ईएमआई 44,986 रुपये बैठेगी. इसमें कुल ब्याज भुगतान 57.96 लाख रुपये आएगा. यही लोन अगर 25 साल के लिए लें तो ईएमआई घटकर 41,960 रुपये रह जाएगी. लेकिन, कुल ब्याज बढ़कर 75.87 लाख रुपये हो जाएगा. आप देख सकते हैं कि किस तरह पांच साल की अवधि बढ़ने से लोन 17.91 लाख रुपये महंगा हो गया.

उक्त मामले में लंबी अवधि के लोन में ईएमआई कम है. इस तरह कम इनकम वाले भी लोन लेने के पात्र हो जाएंगे. FOIR रेशियो के कारण यह मुमकिन होता है. यह रेशियो इनकम के अनुपात में कुल तय देनदारी को दिखाता है. आदर्श रूप से इसे 40 फीसदी से कम होना चाहिए.

6. इनकम का अतिरिक्त स्रोत दिखाएं अगर इनकम का अतिरिक्त स्रोत है. मसलन आपको रेंटल या बिजनेस इनकम होती है तो भी होम लोन की पात्रता बढ़ जाती है. इस तरह दूसरा घर होने पर उसे किराये पर उठा दें और इस इनकम को मासिक इंफ्लो में दिखाएं.

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