मोदी सरकार का तोहफा – होम और ऑटो लोन होंगे सस्ते

| June 7, 2019

कई मोर्चे पर चुनौतियों से जूझ रही अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने अपनी अल्पावधि उधारी दर यानी रेपो रेट में तत्काल प्रभाव से 25 आधार अंकों (0.25 फीसद) की कटौती कर दी है। अब रेपो रेट छह फीसद से घटकर 5.75 फीसद पर आ गई है, जो सितंबर, 2010 के बाद न्यूनतम है। इस फैसले से ऑटो, होम या पर्सनल लोन सस्ते होंगे। आरबीआइ के गवर्नर ने बैंकों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि ब्याज दरों में गिरावट का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाएं। इससे पहले दोनों बार बैंकों ने घटी ब्याज दर का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाने में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई थी।








आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति की छह सदस्यीय समिति (एमपीसी) ने एकमत से मौद्रिक नीति का रुख ‘तटस्थ’ से बदलकर ‘समायोजित’ कर दिया। दास ने कहा, ‘हमारा निर्णय विकास दर और महंगाई की चिंता से प्रेरित है।’

तीसरी बार कटौती : इस साल तीसरी बार आरबीआइ ने रेपो रेट घटाई है। इससे पहले अप्रैल व फरवरी में आरबीआइ रेपो दर में इतनी ही कटौती (दो बार को मिलाकर कुल 0.50 फीसद) कर चुका है, लेकिन बैंकों ने अपनी ब्याज दरों में मात्र 0.21 फीसद अंक तक का ही फायदा ग्राहकों तक पहुंचाया।




इसलिए बदलाव : अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। विकास दर पांच साल के न्यूनतम (5.8 फीसद) और बेरोजगारी दर 45 साल के उच्चतम (6.1 फीसद) स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, निवेश की रफ्तार सुस्त है, ट्रेड वार के चलते निर्यात की गति थम गई है। मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की वृद्धि दर धीमी है, कृषि क्षेत्र खस्ताहाल है। हाल के महीनों में ग्रामीण क्षेत्रों में निजी उपभोग सुस्त पड़ा है। रिजर्व बैंक ने अपने अनुमान में चालू वित्त वर्ष में विकास दर सात फीसद रहने की उम्मीद जताई है, जबकि अप्रैल में 7.2 फीसद विकास दर रहने का अनुमान जताया था।




यह होगा फायदा

निवेश की रफ्तार जोर पकड़ने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अगले महीने मोदी सरकार-2 का पहला आम बजट पेश करेंगी तो वह अर्थव्यवस्था की गति तेज करने, खासकर रोजगार के अवसर बढ़ाने के उपायों का एलान कर सकती हैं। ऐसे में रेपो रेट में कटौती करके निम्न ब्याज दरों के लिए जो अनुकूल माहौल तैयार किया गया है, उससे अर्थव्यवस्था की रफ्तार तेज होगी।

क्या है रेपो रेट

रेपो वह दर है जिस पर बैंक आरबीआइ से उधार लेते हैं। रेपो दर घटने से बैंक ज्यादा उधार ले सकते हैं और उसे ग्राहकों को सस्ती दरों पर दे सकते हैं। आरबीआइ ने रिवर्स रेपो भी 5.75 से घटा 5.50 फीसद कर दी है। बैंक जब अपनी अतिरिक्त नकदी आरबीआइ के पास जमा करते हैं तो उन्हें रिवर्स रेपो की दर से ब्याज मिलता है।

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