Employees working conditions are worse than those of labourers

| June 7, 2019

देश में नौकरीपेशा लोगों को सबसे ज्यादा काम करना पड़ता है जबकि मजदूरों को उनसे अपेक्षाकृत कम काम करना पड़ता है। नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन (एनएसएसओ) के सर्वे में इसका खुलासा हुआ है।

इस सर्वेक्षण के अनुसार, शहरों में नौकरीपेशा पुरुषों को सप्ताह में करीब 60 घंटे काम करना पड़ रहा है जबकि मजदूर हर हफ्ते 49 घंटे और स्वरोजगार में लगे शहरी लोग 58 घंटे काम करते हैं। हाल में जारी इस रिपोर्ट के अनुसार सप्ताह में शहरी नौकरीपेशा पुरुष जहां 60.3 घंटे काम करते हैं, वहीं महिलाओं को थोड़ी राहत है उन्हें तकरीबन 52.7 घंटे काम करना पड़ता है।








नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गेनाइजेशन ने ये आंकड़े वर्ष 2017-18 की चार तिमाहियों के दौरान एकत्रित किए थे। सभी तिमाहियों के नतीजे भी करीब करीब एक जैसे आए हैं।








महिलाओं के काम के घंटे भी ज्यादा

पुरुषों की तुलना में महिलाओं को दफ्तर के काम में थोड़ी राहत दिखती है। ग्रामीण क्षेत्रों में पुरुष महिलाओं से करीब आठ घंटे ज्यादा काम करते हैं।

Category: News

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