रेलवे में करोड़ों रूपए का घोटाला – सुप्रीम कोर्ट पहुंचा रेलवे का स्टील घोटाला

| June 6, 2019

देश भर में रेलवे विद्युतीकरण की परियोजनाओं में प्रयुक्त किए जा रहे स्टील के स्ट्रक्चर्स का वजन मानक से कम लगाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हो गई है।

ये स्ट्रक्चर्स (ट्रैक के साथ-साथ लगाए जाने वाले खंभे और ढांचे) बिजली के तार को सपोर्ट करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मानक के अनुरूप वजन न होने से स्ट्रक्चर्स उतने मजबूत नहीं, जितने होने चाहिए और ये यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा बने रहेंगे।








याचिका जम्मू-ऊधमपुर प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली क्वालिटी इंजीनियर्स एंड कांटेक्टर्स कंपनी के निदेशक सतीश मांडवकर ने दायर की है। याचिका में यूनियन आफ इंडिया, कोर के महाप्रबंधक, राइट्स (रेल इंडिया टेक्निकल एंड इकोनॉमिक सर्विस लिमिटेड), के महाप्रबंधक, रेल मंत्रलय, चीफ प्रोजेक्ट डायरेक्टर चेन्नई, चीफ प्राजेक्ट डायरेक्टर अंबाला, सीनियर डिवीजनल इलेक्टिक इंजीनियर, फिरोजपुर मंडल के ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूटर नीरज गुप्ता, मेरठ डिवीजन के रेलवे इलेक्टिफिकेशन के इंजीयिर गौरव गोयल और मेसर्स जैन स्टील इंडस्ट्री को प्रतिवादी बनाया गया।




सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में जिन-जिन अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया गया है, उनकी मेज से ही परियोजना की फाइलें अग्रसारित हुई हैं। करोड़ों रुपये के इस घोटाले से 27 जनवरी 2016 को चेन्नई में पर्दा उठा था। इसके बाद देश भर में विद्युतीकरण परियोजनाओं में इस्तेमाल किए गए स्टील के स्ट्रक्चर्स की जांच हुई तो उनका वजन मानक कम पाया गया। यह बात अलग है कि रेलवे विजिलेंस लेकर सीबीआइ तक ने जांच की, लेकिन मुकदमा नहीं दर्ज किया गया।

चेन्नई से ऊधमपुर तक हुआ घोटाला : गौरतलब है कि इस प्रकरण का पर्दाफाश दैनिक जागरण ने ही किया था। दैनिक जागरण को मिले दस्तावेजों के अनुसार, कोङिाकोड-कन्नूर सेक्शन विद्युतीकरण होने के बाद स्ट्रर्स का वजन करवाया गया जो कम मिला।




सीपीडी (चेन्नई) ने 27 जनवरी 2016 को इलाहाबाद स्थित केंद्रीय रेल विद्युतीकरण संगठन (कोर) के मुख्य विद्युत इंजीनियर (सीईई) को चिट्ठी लिखकर बताया कि स्ट्रर्स का वजन सात से 11 फीसद कम है। इसके बाद महाप्रबंधक ने देशभर के दस मुख्य परियोजना निदेशक (सीपीडी) को चिट्ठी लिखकर स्ट्रर्स का वजन करवाने के आदेश दिए।

जम्मू से ऊधमपुर, ऊधमपुर से कटरा व गाजियाबाद से मुरादाबाद सहित कई सेक्शन में विद्युतीकरण के दौरान इस्तेमाल स्ट्रर्स में स्टील का वजन मानक से 13 से 19 फीसद तक कम पाया गया था। रेलवे की इस रिपोर्ट को भी सुप्रीम कोर्ट में आधार बनाया गया है।

’>> क्वालिटी इंजीनियर्स एंड कांटेक्टर्स के निदेशक ने दायर की याचिका

’>> रेल यात्रियों की सुरक्षा दांव पर लगाने को बनाया आधार

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